IWAI की लाइसेंस व्यवस्था के खिलाफ निषाद समाज ने खोला मोर्चा, महाबैठक में उठाई आवाज

गंगा में पारंपरिक नौकायन से जुड़े नाविकों के अधिकारों, रोजगार और भविष्य को लेकर मंगलवार को दशाश्वमेध घाट पर निषाद (नाविक) समाज की महाबैठक हुई। जल पुलिस चौकी के सामने आयोजित इस बैठक में सराय मोहाना, राजघाट, गायघाट, पंचगंगा, दशाश्वमेध, केदारघाट, अस्सी और मदरवा सहित गंगा तट के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों नाविक और निषाद समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें नाविकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और प्रशासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।
 

वाराणसी। गंगा में पारंपरिक नौकायन से जुड़े नाविकों के अधिकारों, रोजगार और भविष्य को लेकर मंगलवार को दशाश्वमेध घाट पर निषाद (नाविक) समाज की महाबैठक हुई। जल पुलिस चौकी के सामने आयोजित इस बैठक में सराय मोहाना, राजघाट, गायघाट, पंचगंगा, दशाश्वमेध, केदारघाट, अस्सी और मदरवा सहित गंगा तट के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों नाविक और निषाद समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें नाविकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और प्रशासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।

बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) द्वारा नावों के लाइसेंस जारी करने की प्रस्तावित प्रक्रिया का विरोध रहा। वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज सदियों से गंगा में नौकायन और जल परिवहन का कार्य करता आ रहा है तथा वाराणसी में नावों के लाइसेंस और उनके नवीनीकरण की व्यवस्था पारंपरिक रूप से नगर निगम के माध्यम से संचालित होती रही है। ऐसे में किसी अन्य एजेंसी के हस्तक्षेप से नाविकों के समक्ष नई प्रशासनिक और आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि वर्ष 2023 से नगर निगम द्वारा नावों के नवीनीकरण और नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है। इसके कारण बड़ी संख्या में नाविकों को अपने व्यवसाय के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि गंगा पर आश्रित हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है और कई नाविक आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। निषाद समाज ने मांग की कि नावों के लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया पहले की तरह नगर निगम के माध्यम से ही संचालित की जाए। उनका तर्क था कि स्थानीय परिस्थितियों और नाविकों की वास्तविक समस्याओं को नगर निगम बेहतर ढंग से समझ सकता है।

बैठक में नाविकों ने प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि मामूली कारणों पर नावों को सीज कर दिया जाता है और नाविकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों में संतुलन और संवेदनशीलता बरतने की मांग की। लाइफ जैकेट को लेकर भी नाविकों ने अपनी बात रखी। उनका कहना था कि वे यात्रियों को सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कई यात्री स्वयं उसे पहनने से इनकार कर देते हैं या यात्रा के दौरान उतार देते हैं। इसके बावजूद किसी भी जांच या दुर्घटना की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी नाविकों पर डाल दी जाती है। समाज ने मांग की कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर यात्रियों की जवाबदेही भी तय की जाए।

बैठक में छोटे नाविकों और बड़े क्रूज संचालकों के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जाने का भी विरोध किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि छोटे नाविकों पर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता है, जबकि बड़े क्रूजों के मामले में समान कठोरता नहीं दिखाई देती। इसके अलावा निषाद समाज के प्रशिक्षित गोताखोरों को पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभागों में रोजगार देने की मांग भी उठाई गई।

अंत में समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल लाइसेंस का नहीं, बल्कि हजारों नाविक परिवारों के सम्मान, रोजगार और अस्तित्व की रक्षा का सवाल है।