महिला की गलत सर्जरी और मौत पर NHRC सख्त, स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से जांच के आदेश
वाराणसी। बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में 71 वर्षीय राधिका देवी की कथित गलत सर्जरी और बाद में हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने प्रशासन की रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वाराणसी के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से 7 नवंबर 2026 तक विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
यह कार्रवाई मानवाधिकार संगठन पीपुल्स एक्शन फॉर ह्यूमन राइट्स एडवांसमेंट (पहरा) के अध्यक्ष अनिल कुमार मौर्य की शिकायत के आधार पर हुई है। शिकायत के अनुसार, राधिका देवी को 7 मार्च 2026 को रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के इलाज के लिए बीएचयू में भर्ती कराया गया था। उन्हें न्यूरोसर्जरी विभाग में उपचार मिलना था, लेकिन आरोप है कि पहचान संबंधी चूक के चलते ऑर्थोपेडिक्स विभाग में उनके पैर की सर्जरी कर दी गई। इसके बाद 18 मार्च को उनकी न्यूरोसर्जरी की गई। हालांकि उपचार के बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई और 27 मार्च 2026 को उनकी मौत हो गई।
दो मरीजों के एक नाम होने की दलील खारिज
मामले में प्रशासन की ओर से आयोग को बताया गया था कि एक ही नाम के दो मरीज होने के कारण पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई, जिससे सर्जरी में गलती हुई। आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग के अनुसार, मरीज की पहचान सुनिश्चित करना, सर्जिकल साइट की पुष्टि और डब्ल्यूएचओ सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट जैसे अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अस्पताल की जिम्मेदारी है।
शिकायतकर्ता अनिल कुमार मौर्य के मुताबिक, आयोग ने अस्पताल की आंतरिक जांच समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाया है। आरोप है कि समिति का अध्यक्ष उसी टीम के प्रमुख को बनाया गया, जिसके खिलाफ लापरवाही की शिकायत थी।
बाहरी मेडिकल बोर्ड करेगा जांच
आयोग ने निर्देश दिया है कि वाराणसी के जिलाधिकारी सक्षम प्राधिकारी के साथ समन्वय कर आईएमएस-बीएचयू से पूरी तरह स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित कराएं। सीएमओ को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि मामला किसी संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है या नहीं और संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर की आवश्यकता है या नहीं। इसके अलावा पीड़ित परिवार को मुआवजा दिए जाने के संबंध में भी रिपोर्ट मांगी गई है।