बीएचयू में फिर शुरू होगी नेपाली लाइब्रेरी, दो साल बाद छात्रों और शोधार्थियों को मिलेगी सुविधा

बीएचयू में करीब दो वर्षों से बंद पड़ी नेपाली लाइब्रेरी को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर इस लाइब्रेरी को उसके पुराने स्थान पर संचालित करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही लाइब्रेरी के संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से शुरू कराने की जिम्मेदारी राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष को सौंपी गई है।
 

वाराणसी। बीएचयू में करीब दो वर्षों से बंद पड़ी नेपाली लाइब्रेरी को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर इस लाइब्रेरी को उसके पुराने स्थान पर संचालित करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही लाइब्रेरी के संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से शुरू कराने की जिम्मेदारी राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष को सौंपी गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले से नेपाल अध्ययन से जुड़े छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों में खुशी का माहौल है। लंबे समय से छात्र और शिक्षक इस लाइब्रेरी को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे थे। माना जा रहा है कि इसके पुनः संचालन से नेपाल और ट्रांस-हिमालय क्षेत्र से जुड़े अध्ययन और शोध कार्यों को नई गति मिलेगी।

दरअसल, सितंबर 2024 में विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित एक समिति की सिफारिशों के आधार पर तत्कालीन कुलपति ने नेपाल अध्ययन केंद्र की लाइब्रेरी और महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की लाइब्रेरी का विलय बीएचयू के केंद्रीय ग्रंथालय में कर दिया था। ये दोनों पुस्तकालय सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत संचालित होते थे। उस समय इस फैसले का छात्रों और शिक्षकों ने विरोध भी किया था और अलग से लाइब्रेरी बनाए रखने की मांग उठाई थी।

हाल ही में सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख ने कुलपति को पत्र लिखकर नेपाली लाइब्रेरी को पुनः शुरू करने का अनुरोध किया। इस पर विचार करते हुए कुलपति ने लगभग दो वर्ष पुराने आदेश में संशोधन कर नेपाल अध्ययन केंद्र की लाइब्रेरी को फिर से संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी। कुलसचिव कार्यालय की ओर से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि लाइब्रेरी के सुचारू संचालन के लिए केंद्रीय ग्रंथालय तकनीकी और कार्मिक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

बीएचयू और नेपाल के बीच लंबे समय से शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। नेपाल के कई प्रमुख राजनीतिक नेता और बुद्धिजीवी इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। इनमें बिश्वेश्वर प्रसाद कोइराला, सुशीला कार्की, प्रदीप गिरि और रेवती रमण जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। सुशीला कार्की ने वर्ष 1975 में बीएचयू से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की थी। बीएचयू में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों में सबसे अधिक संख्या नेपाल के विद्यार्थियों की होती है। यही कारण है कि नेपाल अध्ययन से जुड़ी इस लाइब्रेरी को शोध और अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

नेपाल अध्ययन केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के क्षेत्रीय अध्ययन कार्यक्रम के तहत सामाजिक विज्ञान संकाय में की गई थी। समय के साथ इस केंद्र के अध्ययन का दायरा बढ़ाया गया और इसमें ट्रांस-हिमालय क्षेत्र तथा भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य देशों के अध्ययन को भी शामिल किया गया। अब लगभग दो साल बाद नेपाली लाइब्रेरी के फिर से खुलने से छात्रों और शोधार्थियों को अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और शोध गतिविधियों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।