आयुर्वेद संकाय में प्रमोशन विवाद पर एनसीआईएसएम की सख्ती, बीएचयू प्रशासन देगा जवाब
वाराणसी। बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) ने मामले को संज्ञान में लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब तलब किया है। आयोग की ओर से लगातार दो पत्र जारी किए जाने के बाद बीएचयू प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। आयोग ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को 25 जून को दिल्ली स्थित कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
आयुर्वेद संकाय में शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़े नियमों तथा न्यूनतम शैक्षणिक अनुभव की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ पदोन्नति मामलों में आयोग द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों और अनुभव संबंधी शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी शिकायत के आधार पर मामला एनसीआईएसएम तक पहुंचा, जिसके बाद आयोग ने इसकी विस्तृत समीक्षा शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग के रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर मुकुल पटेल ने 10 जून को बीएचयू के कुलसचिव को पहला पत्र भेजा था। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक अनुभव और अन्य पात्रता मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने यह भी संकेत दिया था कि यदि नियमों की अनदेखी पाई गई तो इसे गंभीर प्रशासनिक विषय माना जाएगा।
इसके बाद 23 जून को आयोग ने दूसरा पत्र जारी करते हुए बीएचयू प्रशासन को 25 जून को दिल्ली में उपस्थित होने का निर्देश दिया। आयोग ने संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के साथ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित तिथि पर अनुपस्थित रहने की स्थिति में आयोग अपने नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
आयोग की सख्ती के बाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आयुर्वेद संकाय से संबंधित पदोन्नति मामलों की फाइलों और दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है तथा आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि आयोग की अगली कार्रवाई न केवल इस विवाद के भविष्य को तय करेगी, बल्कि विश्वविद्यालय में नियुक्ति और पदोन्नति की आगामी प्रक्रियाओं पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली सुनवाई और बीएचयू प्रशासन के जवाब पर टिकी हुई हैं।