काशी में पहली बार नंदी कैटवॉक, देशी नस्लों के संरक्षण से बढ़ेगी किसानों की आय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में शनिवार को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की ओर से आयोजित ‘रंगीलो काशी’ कार्यक्रम में पहली बार नंदी कैटवॉक कराया गया। इसमें देशी नस्लों के गोवंश की विशेषताओं और उनकी संतानों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में कृषि, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल ने गोवंश की पूजा-अर्चना और बछड़े की आरती उतारी। उन्होंने कहा कि देशी नस्लों के संरक्षण, वैज्ञानिक पशुपालन और नस्ल सुधार से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
 

बीएचयू में ‘रंगीलो काशी’ का आयोजन, मंत्री धर्मपाल बोले- नस्ल सुधार और आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा दूध उत्पादन

साहीवाल, गिर और भदावरी नस्लों का विशेष आकर्षण, नस्ल सुधार से 10 से 12 लीटर तक पहुंचा दूध उत्पादन
 

 

पशुपालकों को सम्मानित कर आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया, कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार से दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर

विशेष वीर्य की कीमत 300 से घटाकर 100 रुपये करने की तैयारी, काशी की गंगा-गिरि गाय की नस्ल विकसित करने का प्रयास

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में शनिवार को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की ओर से आयोजित ‘रंगीलो काशी’ कार्यक्रम में पहली बार नंदी कैटवॉक कराया गया। इसमें देशी नस्लों के गोवंश की विशेषताओं और उनकी संतानों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में कृषि, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल ने गोवंश की पूजा-अर्चना और बछड़े की आरती उतारी। उन्होंने कहा कि देशी नस्लों के संरक्षण, वैज्ञानिक पशुपालन और नस्ल सुधार से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सांड और उनकी संतानों का कराया कैटवॉक
कार्यक्रम में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गिर सहित विभिन्न देशी नस्लों के गोवंश की प्रदर्शनी लगाई गई। साहीवाल सांड के साथ उसकी बछिया, गिर सांड के साथ उसकी बछिया और भदावरी भैंस के साथ उसकी पड़िया को कैटवॉक कराया गया। इसके माध्यम से पशुओं की नस्लीय विशेषताओं और उनकी संतानों को प्रदर्शित किया गया। आयोजन में पशुपालकों को सम्मानित भी किया गया। किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पशुपालन को आय का मजबूत माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया गया।


 

कृत्रिम गर्भाधान से देशी गायों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
मंत्री धर्मपाल ने कहा कि प्रदेश में देशी नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पहले कई देशी नस्ल की गायें एक से दो लीटर दूध देती थीं, लेकिन कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार की तकनीकों से उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बेहतर नस्ल के माध्यम से कई गायों का दूध उत्पादन 10 से 12 लीटर तक पहुंचा है। उन्होंने काशी क्षेत्र की गंगा-गिरि गाय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी नस्ल विकसित करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। एनडीडीबी की ओर से काशी की गिरि गायों की नस्ल को विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

बछिया पैदा कराने वाले विशेष वीर्य की कीमत घटी
मंत्री ने बताया कि बछिया पैदा कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष वीर्य की कीमत पहले 300 रुपये थी, जिसे घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराना और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाना है।

गोवंश संरक्षण को बताया सरकार की प्राथमिकता
गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने के सवाल पर मंत्री धर्मपाल ने सपा और बसपा सरकारों के कार्यकाल पर राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए गाय का गोबर चंदन की तरह पवित्र है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इससे बदबू आती है। उन्होंने गोवंश संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।

मुर्गी, बकरी और भेड़ पालन को भी बताया विभाग का हिस्सा
उत्तर प्रदेश में बीफ निर्यात बढ़ने से जुड़े सवाल पर मंत्री ने कहा कि पशुधन आधारित गतिविधियों में केवल गाय ही शामिल नहीं है। मुर्गी पालन, बकरी पालन और भेड़ पालन भी पशुपालन विभाग के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से जुड़े मांस उत्पादन को भी विभाग बढ़ावा देता है।