महादेव के धाम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, नमामि गंगे ने बांटे कपड़े के थैले

प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच प्रकृति संरक्षण को लेकर सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से जागरूकता का संदेश दिया गया। नमामि गंगे की ओर से आयोजित अभियान में श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान बाबा विश्वनाथ से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और सभी प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना की गई।
 

वाराणसी। प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच प्रकृति संरक्षण को लेकर सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से जागरूकता का संदेश दिया गया। नमामि गंगे की ओर से आयोजित अभियान में श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान बाबा विश्वनाथ से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और सभी प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना की गई।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने श्रद्धालुओं के साथ बाबा विश्वनाथ के चरणों में प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि प्रकृति का अंधाधुंध दोहन रोककर उसके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। मानव जीवन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने महादेव से प्रार्थना करते हुए कहा कि सृष्टि में प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य बना रहे तथा धरती पर सुख, शांति और समृद्धि कायम हो। उन्होंने जंगलों, पहाड़ों, नदियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण की कामना की। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को कम करने और सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

सिंगल यूज पॉलिथीन से दूरी का संदेश
जागरूकता अभियान के दौरान श्रद्धालुओं को सिंगल यूज पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके स्थान पर कपड़े के झोले इस्तेमाल करने का संदेश दिया गया। अभियान के तहत श्रद्धालुओं के बीच कपड़े से बने झोलों का वितरण भी किया गया। नमामि गंगे कार्यकर्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। घर और आसपास के स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विकास के साथ प्रकृति का संतुलन जरूरी
राजेश शुक्ला ने कहा कि आधुनिक विकास ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण पर दबाव भी बढ़ा है। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरियाली और प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन के मूल आधार हैं। ऐसे में विकास की गति के साथ प्रकृति के संरक्षण का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने लोगों से पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग और सहभागिता की भावना के साथ आगे आने का आह्वान किया। पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों, जंगलों और जीव-जंतुओं की रक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण तैयार करने का संकल्प लेने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं से प्रकृति का सम्मान करने, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली में शामिल करने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर रमेश, दिलीप, नितिन, रसिक, गोविंद, बीना, रीता, सीता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नमामि गंगे कार्यकर्ता मौजूद रहे।