शिवभक्तों की सेवा में जुटी ‘नई सुबह एक उम्मीद’ संस्था, कांवड़ियों को पिलाया शीतल जल
वाराणसी। सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव के दर्शन-पूजन के लिए काशी में उमड़ी श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ के बीच सामाजिक संस्था ‘नई सुबह एक उम्मीद’ ने सेवा शिविर लगाकर भक्तों को राहत पहुंचाई। संस्था के कार्यकर्ताओं ने मंदिरों और धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर कतार में खड़े श्रद्धालुओं व कांवड़ियों को शीतल जल वितरित किया। गर्मी और उमस के बीच ठंडा पानी मिलने से भक्तों ने सेवा कार्य की सराहना की।
सावन के अंतिम सोमवार के चलते सुबह से ही वाराणसी के प्रमुख शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांवड़िए और शिवभक्त काशी पहुंचे। मंदिरों की ओर जाने वाले रास्तों पर लंबी कतारें लगी रहीं। इस दौरान ‘नई सुबह एक उम्मीद’ के सदस्यों ने सेवा भाव से श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर शीतल जल उपलब्ध कराया।
संस्था की अध्यक्ष ममता ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान जलाभिषेक का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना सामाजिक दायित्व भी है। संस्था का प्रयास है कि भक्तों को यात्रा के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में यथासंभव सहयोग किया जाए।
संस्था के संस्थापक विजय कुमार ने कहा कि सेवा ही सच्ची शिव भक्ति है। उन्होंने कहा कि सावन में हर वर्ष संस्था की ओर से शिवभक्तों की सेवा के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इस बार भी अंतिम सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ सेवा शिविर लगाया।
शिविर के दौरान संस्था के सदस्यों ने कतारों में लगे कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को शीतल जल पिलाया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की मूलभूत जरूरतों में सहयोग करना समाज के प्रति जिम्मेदारी है। संस्था भविष्य में भी ऐसे सेवा कार्य जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सेवा कार्य में मोहम्मद अनीस, संध्या पांडेय, रहमत अली, अजरा बीबी, नूरी आफरीन, राजश्री साहनी, लक्ष्मी देवी, किरण देवी, रामबाबू गुप्ता, महबूब हसन, रिंकू, मंगेश्वर प्रसाद, करम भारती, रवि कुमार, सुभानंद, सूरज पाल और सुमित बिंद सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
संस्था पदाधिकारियों ने कहा कि विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर शिवभक्तों की सेवा में योगदान दिया। इससे सामाजिक सौहार्द, आपसी सहयोग और काशी की गंगा-जमुनी तहजीब की भावना को मजबूती मिली।