लाइसेंस शुल्क वसूली में नगर निगम ने बनाया नया रिकॉर्ड, स्मार्ट काशी ऐप से 4.13 करोड़ से अधिक जमा

नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में लाइसेंस शुल्क वसूली के मामले में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। निगम द्वारा जारी सूचना के अनुसार अब तक लाइसेंस शुल्क के रूप में कुल 4,13,58,687 रुपये की वसूली की जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। इस उपलब्धि के साथ नगर निगम ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और निर्धारित लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
 

वाराणसी। नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में लाइसेंस शुल्क वसूली के मामले में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। निगम द्वारा जारी सूचना के अनुसार अब तक लाइसेंस शुल्क के रूप में कुल 4,13,58,687 रुपये की वसूली की जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। इस उपलब्धि के साथ नगर निगम ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और निर्धारित लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

नगर निगम के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 में लाइसेंस शुल्क के मद में कुल 2.11 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा पहले ही 4.13 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। निगम ने इस वर्ष लाइसेंस शुल्क वसूली का लक्ष्य 5.85 करोड़ रुपये निर्धारित किया है और अधिकारियों को उम्मीद है कि 31 मार्च तक यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।

निगम अधिकारियों के अनुसार इस बार डिजिटल व्यवस्था का बड़ा योगदान रहा है। Smart Kashi App के माध्यम से व्यापारी और संस्थान घर बैठे ही अपना लाइसेंस शुल्क ऑनलाइन जमा कर रहे हैं। इससे न केवल वसूली की प्रक्रिया तेज हुई है बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ी है। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से व्यापारियों को निगम कार्यालयों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ रहे हैं। नगर निगम के अनुसार अब तक 18,77,550 रुपये की धनराशि चेक के माध्यम से भी प्राप्त हुई है। निगम प्रशासन का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए गृहकर और जलकर के साथ-साथ लाइसेंस विभाग भी पूरी तरह सक्रिय है और बकायेदारों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है।

अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। उन्होंने सभी व्यापारियों और संस्थानों से अपील की है कि समय रहते स्मार्ट काशी ऐप के माध्यम से अपना लाइसेंस शुल्क जमा कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के बाद शुल्क जमा न करने पर बकाया राशि पर 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित संस्थानों के खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

वसूली के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक राजस्व देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानों तथा बार लाइसेंस से प्राप्त हुआ है। इस श्रेणी से करीब 1.66 करोड़ रुपये की आय हुई है। इसके अलावा होटल और गेस्ट हाउस से लगभग 64.14 लाख रुपये, नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लीनिकों से करीब 85.45 लाख रुपये, ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटरों से लगभग 11.60 लाख रुपये तथा फाइनेंस, चिटफंड और इंश्योरेंस कंपनियों से करीब 11.40 लाख रुपये की वसूली की गई है। वहीं निजी कोचिंग संस्थानों से भी लगभग 1.15 लाख रुपये का शुल्क प्राप्त हुआ है।