IIT BHU और जर्मनी की बर्गिशे यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू, संयुक्त शोध और अकादमिक विस्तार को मिलेगा सहयोग, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बढ़ेंगे अवसर
वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी और जर्मनी की बर्गिशे यूनिवर्सिटी वुपर्टाल (BUW) के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को नई दिशा देते हुए संस्थागत स्तर पर समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। एक अक्टूबर 2026 को हुए इस समझौते से दोनों संस्थानों के बीच पहले से चल रहे विभागीय सहयोग को अब व्यापक संस्थागत स्वरूप मिलेगा। इसके तहत संयुक्त शोध परियोजनाओं, विद्यार्थी एवं शिक्षक आदान-प्रदान तथा अंतरराष्ट्रीय अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
विभागीय सहयोग से संस्थागत साझेदारी तक
दोनों संस्थानों के बीच सहयोग की शुरुआत सिविल इंजीनियरिंग विभागों के स्तर पर हुई थी। स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन (SPARC) के तहत संचालित संयुक्त शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के सकारात्मक परिणामों के बाद सहयोग को संस्थान स्तर तक विस्तार देने का निर्णय लिया गया।
नए समझौते के तहत अब विभिन्न विभागों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाओं और अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के आदान-प्रदान के अवसर भी विकसित होंगे। सिविल इंजीनियरिंग के अलावा इंजीनियरिंग और विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में बहुविषयक शोध के लिए भी दोनों संस्थानों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ेगा।
पेवमेंट स्कैनिंग तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला
एमओयू का आदान-प्रदान आईआईटी-बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने संस्थान में आयोजित SPARC-GIANT International Workshop on “Pavement Scanning Technologies” के दौरान किया। इस अवसर पर जर्मनी से आए प्रो. पाहिरंगन शिवापाथम और बर्गिशे यूनिवर्सिटी वुपर्टाल के 11 विद्यार्थियों का दल मौजूद रहा।
कार्यशाला में सड़क और पेवमेंट की आधुनिक जांच तकनीकों पर व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) और ट्रैफिक स्पीड डिफ्लेक्टोमीटर (TSD) जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से सड़क एवं पेवमेंट की स्थिति का आकलन करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सतत अवसंरचना पर संयुक्त शोध की उम्मीद
आईआईटी-बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच सहयोग ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विभागीय स्तर से शुरू हुआ यह सहयोग अब संस्थागत स्तर तक पहुंचा है। इससे संयुक्त शोध, विद्यार्थी-शिक्षक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
विस्तारित साझेदारी के माध्यम से सतत अवसंरचना, सड़क एवं पेवमेंट इंजीनियरिंग, उन्नत अवसंरचना जांच तकनीकों और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों पर संयुक्त शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही दोनों संस्थान विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी कार्य करेंगे।