लंका क्षेत्र में बंदरों का आतंक, दहशत में आमजन, प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

शहर के प्रमुख इलाकों में शामिल लंका क्षेत्र में इन दिनों बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम नागरिकों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मोहल्लों, मुख्य सड़कों, कॉलोनियों और बाजारों में सैकड़ों की संख्या में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं।
 

वाराणसी। शहर के प्रमुख इलाकों में शामिल लंका क्षेत्र में इन दिनों बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम नागरिकों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मोहल्लों, मुख्य सड़कों, कॉलोनियों और बाजारों में सैकड़ों की संख्या में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बंदर आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर चढ़कर सीटें फाड़ देते हैं, शीशे तोड़ देते हैं और वाहनों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार बंदर लोगों के हाथों में पकड़ा सामान, फल-सब्जी, दूध के पैकेट और अन्य खाद्य सामग्री छीनकर भाग जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है।

स्कूल जाने वाले बच्चों और सुबह-शाम टहलने निकलने वाले बुजुर्गों पर बंदरों के हमले का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बंदर अचानक झपट्टा मार देते हैं, जिससे कई बार लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं। संकरी गलियों में जब बंदरों के झुंड घुस जाते हैं, तो डर का माहौल बन जाता है और लोग घरों में कैद होकर रह जाते हैं।

व्यापारियों के लिए भी यह समस्या गंभीर बनती जा रही है। लंका क्षेत्र के दुकानदारों का कहना है कि बंदर दुकानों के बाहर रखे फल, बिस्किट, चिप्स और अन्य सामान उठा ले जाते हैं, जिससे उन्हें रोजाना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बचाने के लिए जाल और तिरपाल तक लगा रखे हैं, इसके बावजूद बंदरों से पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है।

स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। न तो बंदरों को पकड़ने के लिए कोई विशेष टीम तैनात की गई है और न ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की कोई स्पष्ट योजना सामने आई है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की जाए, उन्हें शहर से दूर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाए, प्रभावित इलाकों में नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए और भविष्य में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस योजना बनाई जाए।