मीर रंजन नेगी ने विद्यार्थियों को दिया संघर्ष से सफलता का मंत्र, तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
वाराणसी। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को खेल जगत की महान हस्तियों के संघर्ष, उपलब्धियों और जीवन अनुभवों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। शारीरिक शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. लिनेट खाखा के संयोजन में आयोजित कार्यशाला का विषय ‘Legendary of Sports’ रखा गया है। उद्घाटन सत्र में भारतीय हॉकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और प्रशिक्षक मीर रंजन नेगी मुख्य अतिथि रहे।
कार्यक्रम के दौरान मीर रंजन नेगी ने विद्यार्थियों के साथ अपने खेल जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए प्रतिभा के साथ अनुशासन, निरंतर अभ्यास, समर्पण और आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि खेल को केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं समझना चाहिए। खेल व्यक्ति के व्यक्तित्व, चरित्र और नेतृत्व क्षमता के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नेगी ने अपने जीवन के संघर्षों और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर में बदलने की सीख दी। उन्होंने कहा कि असफलता किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ने का अवसर है। उनके प्रेरक संबोधन से कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं में उत्साह और नई ऊर्जा का संचार हुआ।
‘चक दे! इंडिया’ से जुड़ी है जीवनगाथा
मीर रंजन नेगी भारतीय हॉकी के चर्चित नामों में शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय गोलकीपर के रूप में उन्होंने भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ी के बाद प्रशिक्षक के रूप में भी उन्होंने भारतीय हॉकी को योगदान दिया। उनकी संघर्षपूर्ण खेल यात्रा को लोकप्रिय फिल्म ‘चक दे! इंडिया’ की कहानी के प्रमुख प्रेरणास्रोतों में माना जाता है।
नेगी 1998 एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम से जुड़े रहे। इसके अलावा 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के गोलकीपिंग कोच और 2004 हॉकी एशिया कप विजेता भारतीय टीम के सहायक कोच की जिम्मेदारी भी निभाई।
खेल भावना और नेतृत्व पर जोर
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में खेल भावना के साथ नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना विकसित करना है। आयोजकों के अनुसार, खेलों में शारीरिक दक्षता के साथ मानसिक मजबूती, निर्णय लेने की क्षमता और टीम के साथ समन्वय भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. सुषमा घिल्डियाल, डॉ. मयंक नारायण सिंह, प्रो. राजीव व्यास, डॉ. दीपक डोगरा और डॉ. अभिषेक वर्मा सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। कार्यशाला के अगले दो दिनों में खेल विशेषज्ञों के व्याख्यान, संवाद और अनुभव साझा करने के सत्र आयोजित होंगे।