पितृ पक्ष में आस्था संग पर्यावरण संरक्षण का संदेश, श्रद्धालुओं को बांटे तुलसी के पौधे

पितृ पक्ष के तीसरे दिन मंगलवार को तुलसी घाट पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। गंगा स्नान, श्राद्ध और तर्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच जागृति फाउंडेशन की ओर से तुलसी के पौधों का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं को पौधे देकर उन्हें पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण और उसकी नियमित देखभाल के लिए प्रेरित किया गया।
 

तुलसी घाट पर तीसरे दिन हुआ पौधा वितरण, पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण का किया आह्वान

वाराणसी। पितृ पक्ष के तीसरे दिन मंगलवार को तुलसी घाट पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। गंगा स्नान, श्राद्ध और तर्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच जागृति फाउंडेशन की ओर से तुलसी के पौधों का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं को पौधे देकर उन्हें पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण और उसकी नियमित देखभाल के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी के विद्वान एवं कर्मकांडी पंडित हेमंत त्रिपाठी उर्फ हांडी गुरु ने गंगा तट पर तर्पण करने पहुंचे लोगों को तुलसी के पौधे वितरित किए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में तुलसी का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय मानी जाती है। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान तुलसी का पौधा लगाना धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का भी माध्यम बन सकता है।

कार्यक्रम संयोजक एवं जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र ने कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इस दौरान श्रद्धालु गंगा में जल अर्पित कर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाए जाएं और उनकी देखभाल की जाए तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी संदेश होगा।

मंगलवार सुबह से ही तुलसी घाट पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। लोगों ने गंगा स्नान के बाद वैदिक विधि-विधान से अपने पूर्वजों का तर्पण किया। इसके बाद आयोजकों की ओर से उन्हें तुलसी के पौधे दिए गए। श्रद्धालुओं से पौधों को घर, मंदिर परिसर या अन्य उपयुक्त स्थान पर लगाने और नियमित देखभाल करने की अपील की गई।

जागृति फाउंडेशन की ओर से पितृ पक्ष के दौरान पौधा वितरण अभियान चलाया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करना है। आयोजकों ने कहा कि पूर्वजों की स्मृति में लगाया गया पौधा लंबे समय तक प्रकृति और समाज के लिए उपयोगी बन सकता है। कार्यक्रम में प्रभुदत्त त्रिपाठी, पंकज शुक्ला, स्वर्ण प्रताप चतुर्वेदी, नरेंद्र ओझा, सुमित त्रिपाठी, धीरज कुमार मिश्रा, सुरेश सिंह, गौतम चतुर्वेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।