काशी में जूना अखाड़े के संतों की बैठक, हरिद्वार अर्धकुंभ और नासिक सिंहस्थ कुंभ को लेकर लिए गए अहम निर्णय

पवित्र सावन मास से पूर्व काशी में जूना अखाड़े की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आध्यात्मिक, सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने की। इस दौरान गुप्त नवरात्र की आध्यात्मिक महत्ता, संन्यास परंपरा, समाज कल्याण, आगामी हरिद्वार अर्धकुंभ और नासिक सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के साथ-साथ शिक्षा और संस्कार आधारित व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
 

नवंबर में हरिद्वार में नगर प्रवेश और जनवरी में निकलेगी पेशवाई
 

गुप्त नवरात्र को बताया आत्मशुद्धि और लोककल्याण का पर्व 
 

संतों ने शिक्षा में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के समावेश पर दिया जोर
 

भारती विद्यालय की नई प्रबंध समिति का सर्वसम्मति से हुआ गठन
 

धर्म, संस्कृति और समाज सेवा को आगे बढ़ाने का लिया गया संकल्प

वाराणसी। पवित्र सावन मास से पूर्व काशी में जूना अखाड़े की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आध्यात्मिक, सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने की। इस दौरान गुप्त नवरात्र की आध्यात्मिक महत्ता, संन्यास परंपरा, समाज कल्याण, आगामी हरिद्वार अर्धकुंभ और नासिक सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के साथ-साथ शिक्षा और संस्कार आधारित व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि गुप्त नवरात्र केवल साधना और शक्ति उपासना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और लोककल्याण का श्रेष्ठ अवसर भी है। उन्होंने कहा कि संन्यासी का जीवन व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका प्रत्येक क्षण समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए समर्पित होना चाहिए। उन्होंने संत समाज से धर्म संरक्षण, नैतिक मूल्यों के संवर्धन और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

बैठक में आगामी धार्मिक आयोजनों की तैयारियों पर भी विस्तृत मंथन किया गया। निर्णय लिया गया कि हरिद्वार में जूना अखाड़े का नगर प्रवेश नवंबर माह में होगा, जबकि जनवरी में पारंपरिक पेशवाई निकाली जाएगी। इसके बाद साधु-संत लगभग दो महीने तक हरिद्वार में प्रवास कर धार्मिक अनुष्ठानों, साधना और विभिन्न शाही स्नानों में भाग लेंगे। बैठक में बताया गया कि हरिद्वार अर्धकुंभ 14 जनवरी से प्रारंभ होकर 20 अप्रैल तक चलेगा। वहीं महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ की औपचारिक शुरुआत 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण के साथ होगी, जबकि प्रमुख धार्मिक आयोजन अगले वर्ष 2 अगस्त से प्रारंभ होंगे।


बैठक के बाद बैजनत्था स्थित भारती विद्यालय की प्रबंध समिति की कार्यकारिणी का चुनाव भी जिला शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न कराया गया। इस अवसर पर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। विद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्रवान, संस्कारवान और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करने की तपोभूमि है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के समावेश पर विशेष बल दिया।

बैठक में सर्वसम्मति से नई प्रबंध समिति का गठन किया गया। अध्यक्ष पद पर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, उपाध्यक्ष स्वामी कपिल पुरी महाराज, प्रबंधक स्वामी प्रेम गिरि महाराज, उप-प्रबंधक स्वामी उमाशंकर भारती महाराज, कोषाध्यक्ष स्वामी रामेश्वर गिरि महाराज तथा मंत्री स्वामी कंचन गिरि महाराज को चुना गया। इसके अलावा स्वामी ओंकार भारती, स्वामी पृथ्वी गिरि, स्वामी वीरेन्द्रानंद गिरि, स्वामी महेंद्रानंद गिरि और स्वामी शैलेन्द्र गिरि महाराज को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया। साधारण कार्यकारिणी में भी कई संतों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

बैठक का समापन धर्म, शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के प्रति समर्पण के संकल्प के साथ हुआ। संतों ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी सावन, हरिद्वार अर्धकुंभ और सिंहस्थ कुंभ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को नई ऊर्जा देने के साथ जनसहभागिता को भी व्यापक स्वरूप प्रदान करेंगे।