वाराणसी में गदा-डम्बल प्रतियोगिता, दूर-दूर से पहुंचे पहलवान, दिखाया दमखम
वाराणसी। क्षेत्र की पारंपरिक खेल संस्कृति को जीवंत रखने के उद्देश्य से भव्य गदा-डम्बल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में स्थानीय पहलवानों के साथ मिर्जापुर, आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर समेत आसपास के कई जिलों से पहलवान पहुंचे। खिलाड़ियों ने अपनी शारीरिक क्षमता और दमखम का प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
आयोजन समिति के सदस्य गोविंद ग्वाल ने बताया कि गदा-डम्बल प्रतियोगिता क्षेत्र की पुरानी परंपराओं में शामिल रही है। उनके अनुसार, यह परंपरा अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही है। समय के साथ पारंपरिक खेलों का स्वरूप भले बदला हो, लेकिन क्षेत्र के लोगों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा है।
वरिष्ठों की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास
आयोजकों के अनुसार, पूर्व में इस प्रतियोगिता का संचालन पंडित कमलापति त्रिपाठी और डॉ. संपूर्णानंद जैसे वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित लोगों की परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके समय से चली आ रही इस विरासत को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आयोजन को लगातार जारी रखा जा रहा है। प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को पारंपरिक व्यायाम और शारीरिक मजबूती से जुड़े खेलों से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।
प्रतियोगिता स्थल पर पहलवानों के प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। गदा और डम्बल उठाने के दौरान पहलवानों के दमखम पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया। ग्रामीण क्षेत्र की पारंपरिक खेल संस्कृति का माहौल पूरे आयोजन के दौरान देखने को मिला।
विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार
आयोजन समिति की ओर से प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए हैं। इनमें फ्रिज, कूलर और एसी के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान, दीवार घड़ी सहित कई अन्य पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कारों को लेकर प्रतिभागियों और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
आयोजकों का कहना है कि प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा कराना नहीं, बल्कि क्षेत्र की पुरानी गदा-डम्बल परंपरा को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। दूर-दराज से पहुंचे पहलवानों की भागीदारी ने आयोजन को और व्यापक बना दिया।