मोबाइलासुर का संहार करेंगी मां दुर्गा, डिजिटल जंजीरों में जकड़ा दिखेगा बच्चा

शारदीय नवरात्र को लेकर काशी में दुर्गा पूजा पंडालों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार पूजा पंडालों में देवी आराधना के साथ सामाजिक संदेशों को भी खास तवज्जो दी जा रही है। कचहरी क्षेत्र के जय माता दी स्पोर्टिंग क्लब के पंडाल में मां दुर्गा आधुनिक दौर की एक बड़ी समस्या के प्रतीक ‘मोबाइलासुर’ का संहार करती नजर आएंगी। यहां मोबाइल की बढ़ती लत और बच्चों पर उसके प्रभाव को धार्मिक और तकनीकी प्रस्तुति के जरिए दिखाने की तैयारी है।
 

कचहरी के जय माता दी स्पोर्टिंग क्लब के पंडाल में पांच मिनट के इलेक्ट्रॉनिक शो से मोबाइल की लत के दुष्परिणामों का संदेश

16 फीट ऊंचे मोबाइल के प्रतिरूप में दिखेगा ‘मोबाइलासुर’ का जाल, मां दुर्गा के तीसरे नेत्र की ज्योति से होगा संहार

मोबाइल की लत को बनाया गया इस बार दुर्गा पूजा पंडाल की थीम, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और गेमिंग के प्रतीकों से तैयार होगा डिजिटल जाल

पांच मिनट के इलेक्ट्रॉनिक शो में मां-बच्चे के रिश्ते पर मोबाइल के प्रभाव का होगा प्रदर्शन 

मोबाइल में व्यस्त बच्चे को मां दुर्गा की आराधना से लत से मुक्त होने का दिखेगा संदेश

मां दुर्गा के तीसरे नेत्र से निकलेगी ज्योति, मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगा ‘एरर, सुतली से तैयार की जा रही विशेष प्रतिमा, इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से आएगी सजीवता

शिल्पकार शीतल चौरसिया करीब एक दशक से बना रहे हैं देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, धार्मिक आस्था के साथ बच्चों और अभिभावकों को मोबाइल के संतुलित इस्तेमाल का संदेश

रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। शारदीय नवरात्र को लेकर काशी में दुर्गा पूजा पंडालों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार पूजा पंडालों में देवी आराधना के साथ सामाजिक संदेशों को भी खास तवज्जो दी जा रही है। कचहरी क्षेत्र के जय माता दी स्पोर्टिंग क्लब के पंडाल में मां दुर्गा आधुनिक दौर की एक बड़ी समस्या के प्रतीक ‘मोबाइलासुर’ का संहार करती नजर आएंगी। यहां मोबाइल की बढ़ती लत और बच्चों पर उसके प्रभाव को धार्मिक और तकनीकी प्रस्तुति के जरिए दिखाने की तैयारी है।

खोजवा निवासी शिल्पकार शीतल चौरसिया इस बार क्लब के लिए विशेष प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। करीब एक दशक से देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार कर रहे शिल्पकार हर साल नए प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी उनकी बनाई प्रतिमाओं में कला के साथ इलेक्ट्रॉनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब तीन विशेष इलेक्ट्रॉनिक प्रतिमाओं के जरिए देवी के विभिन्न स्वरूपों को सजीव अंदाज में प्रस्तुत करने की तैयारी है।


16 फीट के मोबाइल में डिजिटल जंजीरों से जकड़ा दिखेगा बच्चा
पंडाल के प्रवेश द्वार पर करीब 16 फीट ऊंचे मोबाइल फोन का प्रतिरूप तैयार किया जा रहा है। इसके साथ एक बच्चे को डिजिटल जंजीरों में जकड़ा हुआ दिखाया जाएगा। पंडाल के भीतर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और विभिन्न मोबाइल गेम व एप के प्रतीकों को मकड़ी के जाल की तरह आपस में उलझा हुआ दिखाया जाएगा। यह दृश्य बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में बढ़ती निर्भरता का प्रतीक होगा।

पंडाल में करीब पांच मिनट का इलेक्ट्रॉनिक शो भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें एक मां अपने बच्चे को आवाज देती है, लेकिन बच्चा मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण उसकी ओर ध्यान नहीं देता। मां उसे मोबाइल से दूर करने का प्रयास करती है, लेकिन मोबाइल का आकर्षण बच्चे को अपनी ओर खींचता रहता है। इसके बाद मां मां दुर्गा की आराधना कर बच्चे को इस लत से मुक्त कराने की प्रार्थना करती है।


तीसरे नेत्र की ज्योति से होगा मोबाइलासुर का अंत
इलेक्ट्रॉनिक प्रस्तुति के अगले चरण में मां दुर्गा का शक्ति स्वरूप सामने आएगा। मां के तीसरे नेत्र से ज्योति निकलकर मोबाइलासुर के पेट पर लगी मोबाइल स्क्रीन से टकराएगी। स्क्रीन पर ‘एरर’ दिखाई देगा, जिसे मोबाइल रूपी महिषासुर के अंत के संकेत के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके बाद बच्चा मोबाइल छोड़कर अपनी मां की ओर जाता नजर आएगा।

प्रतिमा में महिषासुर को मोबाइल के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उसके पेट पर मोबाइल स्क्रीन लगाई जा रही है, जबकि मां दुर्गा सिंह पर सवार होकर उसका संहार करती दिखाई देंगी। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को मोबाइल के संतुलित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना है।

सुतली से तैयार हो रही विशेष प्रतिमा
शिल्पकार शीतल चौरसिया ने बताया कि वह हर वर्ष प्रतिमाओं में कुछ नया प्रयोग करने का प्रयास करते हैं। पिछले वर्ष धूप से मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की गई थी, जबकि इस बार सुतली से विशेष प्रतिमा बनाई जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के जरिए प्रतिमाओं को सजीव रूप देने का भी प्रयास किया जा रहा है।

जय माता दी स्पोर्टिंग क्लब के अध्यक्ष मिहिर भल्ला और कार्यवाहक अध्यक्ष हिमांशु यादव ने बताया कि बच्चों में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इस बार पंडाल की थीम सामाजिक संदेश पर आधारित रखी गई है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था और मनोरंजन के साथ मोबाइल की लत के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

काशी की दुर्गा पूजा में धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ने की परंपरा रही है। इसी क्रम में इस बार मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप के माध्यम से मोबाइल की लत से बचने, परिवार के साथ संवाद बढ़ाने और तकनीक का संतुलित इस्तेमाल करने का संदेश देने की तैयारी है।