लोकायुक्त जांच के बीच ट्रॉमा सेंटर प्रभारी को हटाने की मांग तेज, छात्रों ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह के खिलाफ चल रही लोकायुक्त जांच को लेकर छात्रों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी के नेतृत्व में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जांच पूरी होने तक डॉ. सौरभ सिंह को प्रशासनिक दायित्वों से पृथक किया जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि डॉ. सौरभ सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग तथा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच लोकायुक्त संगठन उत्तर प्रदेश द्वारा की जा रही है। छात्रों ने दावा किया कि उप लोकायुक्त कार्यालय की ओर से संबंधित मामले में समन जारी कर अभिलेख, तथ्यात्मक आख्या और शपथपत्र सहित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
छात्रों का कहना है कि जब किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक आरोपों की जांच चल रही हो, तब निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारी को जांच अवधि तक प्रशासनिक पद से अलग किया जाना आवश्यक होता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ट्रॉमा सेंटर से जुड़े कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, खरीद संबंधी पत्रावलियां और आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अभिलेख अभी भी संबंधित अधिकारी के नियंत्रण में हैं, जिससे साक्ष्यों और संभावित गवाहों के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं बल्कि संस्थागत गरिमा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाई गई है। छात्र प्रतिनिधि सुजीत पासवान ने कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को पद पर बनाए रखना विश्वविद्यालय समुदाय और आम जनता के बीच कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि जांच को पूरी तरह स्वतंत्र वातावरण में संपन्न कराया जाए और किसी भी प्रकार से गवाहों या अभिलेखों को प्रभावित होने से रोका जाए।
वहीं छात्र नेता हर्ष त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा है और प्रशासन को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि यदि अभिलेखों की सुरक्षा और प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की गई तो जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कुछ सार्वजनिक मंचों और मीडिया माध्यमों में यह प्रचारित किया जा रहा है कि लोकायुक्त द्वारा मामले को समाप्त कर दिया गया है, जबकि हाल में जारी समन और उपलब्ध दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है। छात्रों ने प्रशासन से मामले में पारदर्शी कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय समुदाय का विश्वास बनाए रखने की मांग की। इस दौरान हर्ष त्रिपाठी, अंकित पूर्वे, रजत सिंह, अभय सिंह “मिक्कू”, कृष्णकांत पाठक, कुमार अभिषेक, हिमांशु राय और वर्चस्व सिंह सहित कई छात्र उपस्थित रहे।