25 हजार करोड़ की एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते बेवजह परेशान न हों स्थानीय नागरिक, राज्यमंत्री ने एनएचएआई अफसरों को दी हिदायत, बोले-जनता के हितों का रखें पूरा ध्यान 

शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित करीब 25 हजार करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की आशंकाओं और भ्रम को दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने स्पष्ट किया कि परियोजना के निर्माण से किसी भी नागरिक को अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने एनएचएआई अधिकारियों को डिजाइन और रैंप निर्माण में स्थानीय परिस्थितियों व नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
 

वाराणसी। शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित करीब 25 हजार करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की आशंकाओं और भ्रम को दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने स्पष्ट किया कि परियोजना के निर्माण से किसी भी नागरिक को अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने एनएचएआई अधिकारियों को डिजाइन और रैंप निर्माण में स्थानीय परिस्थितियों व नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

मंत्री ने गुरुवार को सर्किट हाउस सभागार में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, एनएचएआई अधिकारियों और क्षेत्रीय पार्षदों के साथ बैठक कर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड की प्रगति और कार्ययोजना की जानकारी ली। एनएचएआई अधिकारियों ने डिजिटल प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना के प्रस्तावित रूट, रैंप और निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित एलिवेटेड रोड काजीसराय से शुरू होकर हरहुआ फ्लाईओवर और रिंग रोड को पार करते हुए कैंट क्षेत्र के ऊपर से फुलवरिया समेत विभिन्न इलाकों से होकर नमो घाट की ओर जाएगी। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में वाहनों के आवागमन के लिए रैंप बनाए जाने का प्रस्ताव है।

बैठक में हुकुलगंज में प्रस्तावित रैंप को लेकर विशेष चर्चा हुई। मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि यदि यहां रैंप बनाए जाने से बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक प्रभावित होते हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को हुकुलगंज के बजाय आयुर्वेद कॉलेज के पास रैंप उतारने के विकल्प का अध्ययन करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं का मूल उद्देश्य जनसुविधाओं में वृद्धि करना है। ऐसे में एलिवेटेड रोड की डिजाइन इस प्रकार तैयार होनी चाहिए कि शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होने के साथ स्थानीय आबादी पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े।

एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में सबसे अधिक चुनौतियां रैंप के स्थानों को लेकर सामने आ रही हैं। इसके मद्देनजर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रैंप के स्थान और डिजाइन में विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच आवागमन सुगम होने और यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है।