मणि मंदिर में मध्यरात्रि जन्मे लीलाधर, 101 क्विंटल हलवे के प्रसाद से भक्तों में बंटी खुशियां
श्रीमणि मंदिर में भव्य झांकियों ने मोहा मन, पंचामृत समेत विभिन्न द्रव्यों से हुआ श्रीकृष्ण का अभिषेक, भजन, कथक और बांसुरी वादन ने बांधा समां
वाराणसी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्रीमणि मंदिर, धर्मसंघ, दुर्गाकुंड का प्रांगण कान्हा के जन्मोत्सव के उल्लास में डूबा नजर आया। मंदिर परिसर में लीलाधर की लीलाओं पर आधारित दर्जनभर आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। मंदिर की प्रतिकृति के साथ सेल्फी लेने को लेकर भी लोगों में उत्साह दिखाई दिया। पूरे परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से सजाया गया था। कोलकाता से आए कारीगरों ने कामिनी, अशोक की पत्तियों तथा गुलाब, गेंदा और रजनीगंधा के फूलों से मंदिर की भव्य सजावट की।
मध्यरात्रि में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ जन्म
मध्यरात्रि में धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज के पावन सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव संपन्न हुआ। इससे पहले ठाकुरजी का विभिन्न विधियों से अभिषेक किया गया। सर्वप्रथम पंचामृत स्नान, इसके बाद चंदन से गंधोदक स्नान, नारियल पानी से गर्भोदक स्नान, भस्मोदक और पुष्पोदक स्नान कराया गया। तत्पश्चात सेव, अनानास, संतरा, मौसमी और अनार के रस से फालोदक स्नान कराया गया। अंत में दुर्वोदक और कुशोदक स्नान संपन्न हुआ।
इसके बाद कोलकाता से विशेष रूप से मंगाए गए वस्त्रों से राधा-माधव को अलंकृत किया गया और विविध स्वर्णाभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया। समस्त धार्मिक आयोजन पं. जगजीतन पाण्डेय के संयोजकत्व में संपन्न हुए।
छप्पन भोग के साथ 101 क्विंटल हलवे का प्रसाद
जन्माष्टमी के अवसर पर ठाकुरजी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही 101 क्विंटल हलवे का विशेष भोग लगाया गया, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। विशाल मात्रा में तैयार हलवा उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।
संगीत और कथक ने बढ़ाई जन्मोत्सव की भव्यता
जन्माष्टमी के दौरान मंदिर परिसर संगीत की सुर-लहरियों से भी गुंजायमान रहा। संगीतकार कृष्णा एवं सहयोगियों ने भजनों की प्रस्तुति दी। शाम सात बजे कलाकार अमृत मिश्र, शाम्भवी भट्ट और रजत कुशवाहा एवं सहयोगियों ने कथक आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। वहीं शनिष ज्ञावली ने बांसुरी वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद रात नौ बजे से मध्यरात्रि तक गायिका शैलबाला ने भजन और बधाई गीत प्रस्तुत किए। भक्ति, संगीत और आकर्षक सजावट के बीच मणि मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव काशी में ब्रजधाम जैसा आध्यात्मिक वातावरण प्रस्तुत करता नजर आया।