किन्नर अखाड़ा ने गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का किया अभिषेक, निकाली भव्य शोभायात्रा, गूंजा हर-हर महादेव
वाराणसी। किन्नर अखाड़े की ओर से गुरुवार को गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया गया। इस दौरान भव्य शोभायात्रा निकाली गई। महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरि के सानिध्य में सैकड़ों किन्नर श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए निकले। करीब दो किलोमीटर लंबी यात्रा में ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते और हर-हर महादेव के जयघोष करते हुए आगे बढ़े।
शोभायात्रा से पहले दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा का विधि-विधान से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गंगा आरती और पूजा-अर्चना के बाद कलशों में गंगाजल भरा। इसके बाद गंगाजल से भरे कलश हाथों में लेकर शोभायात्रा की शुरुआत की गई। ढोल-नगाड़ों की थाप शुरू होते ही श्रद्धालु भक्ति में झूमने लगे। पूरे रास्ते बाबा विश्वनाथ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
शीतला घाट से शुरू हुई शोभायात्रा काशी की विभिन्न गलियों और मार्गों से होते हुए बाबा विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ी। रास्ते में स्थानीय लोगों और राहगीरों की भीड़ यात्रा को देखने के लिए जुटती रही। श्रद्धालुओं के हाथों में सजे कलश और उनके मुख से निकलते हर-हर महादेव के जयघोष लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। कई स्थानों पर लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया।
शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि मां गंगा का जल लेकर बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचना उनके लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने बाबा विश्वनाथ से विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। श्रद्धालु पूरे रास्ते भक्ति भाव में लीन नजर आए।
बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने गंगाजल अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विश्व में शांति और सभी के कल्याण की प्रार्थना की गई। मंदिर परिसर में भी श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरि ने कहा कि बाबा विश्वनाथ से उन्होंने पूरे विश्व के सुख और शांति की प्रार्थना की है। उन्होंने समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव कायम रहने तथा सभी लोगों के सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी में मां गंगा का जल लेकर आकर भगवान शिव का अभिषेक करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
किन्नर अखाड़े की यह शोभायात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता का संदेश भी देती नजर आई। गंगा पूजन से लेकर बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक तक पूरी यात्रा श्रद्धा, भक्ति और विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत रही।