काशी की काष्ठकला का दुनिया में बढ़ा मान, स्पेन से जापान तक राम दरबार और राधा-कृष्ण की मूर्तियों की डिमांड

धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की नगरी काशी अब अपनी प्राचीन काष्ठकला (लकड़ी की हस्तकला) के दम पर वैश्विक बाजार में नई पहचान बना रही है। बनारसी साड़ियों और गुलाबी मीनाकारी की तरह अब वाराणसी की लकड़ी पर उकेरी गई पारंपरिक कलाकृतियां भी विदेशों में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। स्पेन, जापान, सिंगापुर और लंदन सहित कई देशों से भगवान राम दरबार, राधा-कृष्ण, महादेव, गणेश जी की मूर्तियों और धार्मिक झांकियों के बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं।
 

प्राकृतिक रंगों, बारीक नक्काशी और गुलाबी मीनाकारी के संगम ने बढ़ाया आकर्षण, हजार से अधिक कारीगरों को मिल रहा रोजगार

ODOP और GI टैग से मिली नई उड़ान, स्पेन, जापान, सिंगापुर और लंदन से बढ़े ऑर्डर
 

राम दरबार, राधा-कृष्ण, शिव और गणेश की मूर्तियां सबसे अधिक लोकप्रिय 
 

प्राकृतिक रंगों और हाथों की बारीक नक्काशी से तैयार होती हैं कलाकृतियां 
 

गुलाबी मीनाकारी के संगम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ाया आकर्षण 
 

एक हजार से अधिक कारीगर इस कला से जुड़े, बड़ी संख्या में महिलाएं भी कर रहीं काम 
 

पांच पीढ़ियों से परिवार संभाल रहा विरासत, पीएम की पहल और प्रोत्साहन से मिली वैश्विक पहचान 


स्पेशल रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की नगरी काशी अब अपनी प्राचीन काष्ठकला (लकड़ी की हस्तकला) के दम पर वैश्विक बाजार में नई पहचान बना रही है। बनारसी साड़ियों और गुलाबी मीनाकारी की तरह अब वाराणसी की लकड़ी पर उकेरी गई पारंपरिक कलाकृतियां भी विदेशों में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। स्पेन, जापान, सिंगापुर और लंदन सहित कई देशों से भगवान राम दरबार, राधा-कृष्ण, महादेव, गणेश जी की मूर्तियों और धार्मिक झांकियों के बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं।

ODOP और GI टैग से मिली पहचान
उत्तर प्रदेश की एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना में शामिल काशी की काष्ठकला को जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और बाजार दोनों का तेजी से विस्तार हुआ है। पिछले एक दशक में इस पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों की संख्या बढ़कर एक हजार से अधिक हो गई है, जिनमें बड़ी संख्या में महिला कलाकार भी शामिल हैं।


राम दरबार, शिव, राधा-कृष्ण की मूर्तियों की डिमांड 
विदेशी बाजारों में भगवान शिव, गणेश जी की मूर्तियों के साथ-साथ श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण की झांकियों, झूलों और अन्य धार्मिक प्रतिकृतियों की मांग लगातार बढ़ रही है। विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े इन हस्तनिर्मित उत्पादों को स्मृति चिन्ह के रूप में विशेष पसंद कर रहे हैं।

काशी आने वाले श्रद्धालुओं में राम दरबार सबसे लोकप्रिय
काशी आने वाले श्रद्धालुओं के बीच लकड़ी से तैयार राम दरबार सबसे लोकप्रिय उत्पाद बन चुका है। दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालु हों या विदेशी पर्यटक, सभी इन कलाकृतियों को अपने साथ ले जाना पसंद कर रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए कारीगर आधुनिक रंगों और आकर्षक डिजाइनों के साथ पारंपरिक कला को नया स्वरूप दे रहे हैं।

लकड़ी की कलाकृतियों पर गुलाबी मीनाकारी
काशी के कलाकारों ने परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम भी प्रस्तुत किया है। अब लकड़ी की कलाकृतियों पर विश्वप्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे इन उत्पादों की सुंदरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मांग दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पर्यावरण अनुकूल है काशी की काष्ठकला
इस काष्ठकला की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल स्वरूप है। कलाकार रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हैं और उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी पर हाथों से बारीक नक्काशी कर उत्कृष्ट कलाकृतियां तैयार करते हैं। यही वजह है कि काशी की काष्ठकला भारतीय हस्तशिल्प की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।


जीआई टैग मिलने से इस कला को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगी है और असली बनारसी काष्ठकला को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग स्थान प्राप्त हुआ है। सरकारी योजनाओं और निर्यात प्रोत्साहन से कारीगरों को नए बाजार भी उपलब्ध हुए हैं।

पिछले पांच पीढ़ियों से पारंपरिक विरासत संभाले हुए है परिवार 
काष्ठकला कलाकार उदय राज सिंह बताते हैं कि उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए है। उनके अनुसार उनके नाना को इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रकार की लकड़ी से राम दरबार, हनुमान मंदिर, राम मंदिर, चूड़ियां और अन्य धार्मिक एवं सजावटी उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनकी मांग भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। त्योहारों के दौरान इन उत्पादों के ऑर्डर कई गुना बढ़ जाते हैं।

पीएम के प्रोत्साहन से दुनिया भर में मिली पहचान
कारीगरों का मानना है कि पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर वाराणसी की काष्ठकला से निर्मित हस्तशिल्प विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और मेहमानों को भेंट किए जाने से इस कला को वैश्विक मंच मिला है। इसके बाद निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

लोकल टू ग्लोबल अभियान को मिला बल 
आज बनारसी साड़ियों, गुलाबी मीनाकारी और काष्ठकला ने मिलकर काशी को वैश्विक हस्तशिल्प मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। पारंपरिक कला, आधुनिक डिजाइन, जीआई टैग और बढ़ते निर्यात के बल पर काशी की काष्ठकला 'लोकल टू ग्लोबल' अभियान की सफल मिसाल बनकर उभर रही है।

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