ODOP से चमकी काशी की काष्ठ कला, भगवान शिव की 11 मुखी प्रतिमा की विदेशों डिमांड, पीएम और सीएम भी हैं कद्रदान 

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) योजना के तहत काशी की पारंपरिक काष्ठ कला को नई पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से प्रदेश के पारंपरिक शिल्प और हस्तकला को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सम्मान प्राप्त हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
 

वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) योजना के तहत काशी की पारंपरिक काष्ठ कला को नई पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से प्रदेश के पारंपरिक शिल्प और हस्तकला को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सम्मान प्राप्त हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

काशी के प्रसिद्ध काष्ठ शिल्पकार बिहारी लाल अग्रवाल ने भगवान शिव की विशेष 11 मुखी प्रतिमा तैयार की है, जो इन दिनों देश-विदेश में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस अनूठी प्रतिमा में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों के साथ सभी देवी-देवताओं के वास को कलात्मक ढंग से दर्शाने का प्रयास किया गया है। प्रतिमा की बारीक नक्काशी और पारंपरिक शैली लोगों को काफी प्रभावित कर रही है।

बिहारी लाल अग्रवाल ने बताया कि बनारस की यह काष्ठ कला ODOP योजना के अंतर्गत शामिल है और इसे जीआई टैग भी प्राप्त है। यही कारण है कि स्थानीय कलाकारों को अब अपने हुनर को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी बनाई गई भगवान शिव की प्रतिमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी भेंट की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि काशी में निर्मित यह प्रतिमा अब विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना रही है। ब्राजील और स्पेन जैसे देशों तक यह कलाकृति पहुंच चुकी है, जहां विदेशी पर्यटकों ने इसे बेहद पसंद किया। पर्यटकों को जब भगवान शिव के 11 मुखों और उनके आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी गई तो वे काफी प्रभावित हुए और प्रतिमा को स्मृति चिह्न के रूप में अपने साथ लेकर गए।

शिल्पकार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भी विशेष अवसरों पर इस प्रतिमा को उपहार स्वरूप मंगाया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे ऑर्डर मिलते रहेंगे, जिससे काशी की काष्ठ कला को और अधिक वैश्विक पहचान मिलेगी।