हरितालिका तीज की खरीदारी से गुलजार हुए काशी के बाजार, सुहाग सामग्री, हरी चूड़ियों और मिट्टी की शिव-पार्वती प्रतिमाओं की बढ़ी मांग

हरितालिका तीज पर्व की तैयारियों के साथ काशी के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। लंका, रविदास गेट, खोजवा, दुर्गाकुंड और रथयात्रा समेत प्रमुख बाजारों में महिलाएं और युवतियां तीज की खरीदारी में जुटी हैं। सुहाग सामग्री, हरी चूड़ियों, पूजा की डलिया और मिट्टी से बनी भगवान शिव, माता पार्वती व गणेश की प्रतिमाओं की मांग बढ़ गई है। पर्व नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी और तेज होने की उम्मीद है।
 

लंका से दुर्गाकुंड और खोजवा तक बाजारों में उमड़ी महिलाओं की भीड़, पूजा की डलिया में सज रही 16 शृंगार की सामग्री

रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। हरितालिका तीज पर्व की तैयारियों के साथ काशी के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। लंका, रविदास गेट, खोजवा, दुर्गाकुंड और रथयात्रा समेत प्रमुख बाजारों में महिलाएं और युवतियां तीज की खरीदारी में जुटी हैं। सुहाग सामग्री, हरी चूड़ियों, पूजा की डलिया और मिट्टी से बनी भगवान शिव, माता पार्वती व गणेश की प्रतिमाओं की मांग बढ़ गई है। पर्व नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी और तेज होने की उम्मीद है।


हरितालिका तीज पर महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना इस पर्व का प्रमुख हिस्सा है। पूजा के लिए बाजारों में कच्ची मिट्टी से बनी शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमाएं विशेष रूप से उपलब्ध कराई गई हैं।

डलिया में सजेगा सुहाग का संसार
बाजारों में महिलाएं तीज की पूजा के लिए डलिया खरीदती नजर आ रही हैं। इसमें पूजा सामग्री के साथ सुहाग और शृंगार का सामान सजाया जाता है। हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, कंघी, मेहंदी, चुनरी और काजल के साथ नारियल, धूपबत्ती, कपूर, फूल-माला, रोली, अक्षत, रक्षा सूत्र समेत अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी हो रही है।

हरी चूड़ियों की दुकानों पर विशेष भीड़ दिखाई दे रही है। दुकानदारों ने पर्व को देखते हुए विभिन्न डिजाइन और आकार की चूड़ियां सजाकर रखी हैं। मिट्टी की प्रतिमाओं और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। दुकानदार रतन गुप्ता ने बताया कि तीज को लेकर इस बार भी बाजार में अच्छी खरीदारी हो रही है। महिलाओं के लिए यह विशेष पर्व है और पूजा में शिव-पार्वती व गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं का विशेष महत्व माना जाता है।

मां पार्वती की तपस्या से जुड़ी है मान्यता
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर सुभाष पांडेय के अनुसार हरितालिका तीज की परंपरा माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या और संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पति रूप में स्वीकार करने का वर दिया।

उन्होंने बताया कि ‘हरितालिका’ नाम भी पर्व की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें अपने साथ वन में ले गई थीं, ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विपरीत किसी अन्य से न हो। इसी कारण यह पर्व हरितालिका कहलाया। विवाहित महिलाएं पति के दीर्घ जीवन और दांपत्य सुख की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। पूजा में मिट्टी की प्रतिमाओं का प्रयोग इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

काशी में दिख रहा पर्व का रंग
लंका और रविदास गेट से लेकर खोजवा, दुर्गाकुंड और रथयात्रा तक बाजारों में महिलाएं समूह में खरीदारी करती नजर आ रही हैं। हरी चूड़ियों, शृंगार सामग्री और मिट्टी की शिव-पार्वती प्रतिमाओं से सजे बाजारों में धार्मिक और उत्सवी माहौल दिखाई दे रहा है। दुकानदारों को उम्मीद है कि पर्व का दिन करीब आने पर ग्राहकों की संख्या और बढ़ेगी।

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