वाराणसी में सीएम योगी बोले- हम बंटे तो काशी विश्वनाथ मंदिर पर हुआ हमला, रामजन्मभूमि और कृष्ण जन्मभूमि पर खड़ा हुआ गुलामी का कलंक

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता, सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, तो उसकी धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी संकट में पड़ जाती है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या की रामजन्मभूमि और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के बंटने का खामियाजा देश को अपनी विरासत पर हुए आक्रमणों के रूप में भुगतना पड़ा।
 
  • भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर
  • कहा- राष्ट्र पर संकट आता है तो उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत भी खतरे में पड़ जाती है

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता, सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, तो उसकी धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी संकट में पड़ जाती है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या की रामजन्मभूमि और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के बंटने का खामियाजा देश को अपनी विरासत पर हुए आक्रमणों के रूप में भुगतना पड़ा।

हम बंटे, इसलिए विदेशी आक्रांताओं को मिला मौका- सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास से सबक लेना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विदेशी आक्रांता अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होते, तो क्या काशी में बाबा विश्वनाथ के पावन मंदिर को क्षतिग्रस्त और अपवित्र करने का दुस्साहस कोई कर पाता?

उन्होंने अयोध्या और मथुरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर समाज एकजुट रहता, तो क्या रामजन्मभूमि पर 500 वर्षों तक गुलामी का कलंक खड़ा रह पाता और क्या मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ऐसी स्थिति पैदा होती?

मुख्यमंत्री ने इन ऐतिहासिक घटनाओं को समाज में बिखराव से जोड़ते हुए एकता बनाए रखने का संदेश दिया।

राष्ट्र कमजोर होता है तो उसकी संस्कृति पर भी आता है संकट
सीएम योगी ने कहा कि किसी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, बल्कि उसकी संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से भी होती है।

उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र संकट में पड़ता है, तो उसकी विरासत, आध्यात्मिक धरोहर, ऐतिहासिक धरोहर, धर्म और संस्कृति भी संकट का सामना करती हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता को सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण से जोड़ते हुए समाज को इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया।

संतों ने समाज को एकजुट करने के लिए चलाया महाजागरण अभियान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज के बंटवारे के कारण पैदा हुई परिस्थितियों को बदलने के लिए देश के संतों ने अलग-अलग कालखंडों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि संतों ने समाज में जागरूकता लाने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के लिए महाजागरण के अभियान चलाए। इन अभियानों को उन्होंने अपनी साधना और जीवन का हिस्सा बनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी परंपरा को स्वामी प्रणवानंद जी ने भी आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया।

भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में दिया एकता का संदेश
भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की सांस्कृतिक विरासत और संत परंपरा के योगदान को रेखांकित किया।

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