काशी विश्वनाथ धाम में सांस्कृतिक संध्या, संगीत और भक्ति का दिया अद्भुत संगम

त्र नवरात्रि के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित नौ दिवसीय सांस्कृतिक संध्या श्रृंखला के छठे दिन भक्ति, संगीत और नृत्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
 

वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित नौ दिवसीय सांस्कृतिक संध्या श्रृंखला के छठे दिन भक्ति, संगीत और नृत्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के साथ हुआ। सबसे पहले छह वर्षीय सुश्री मैथिली ने ‘शिवार्चनम’ प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उनकी मासूम और भक्ति से परिपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान “हर-हर महादेव” के जयघोष से परिसर गूंजता रहा और श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का विशेष संचार देखने को मिला।

कार्यक्रम का संचालन वाराणसी की प्रसिद्ध मंच संचालिका मीनाक्षी दीक्षित ने किया। उनकी प्रभावशाली और ओजपूर्ण वाणी ने पूरे आयोजन को एक सूत्र में बांधे रखा और दर्शकों को कार्यक्रम से जोड़े रखा। सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय संगीत और भक्ति गायन की शानदार प्रस्तुतियां भी देखने को मिलीं। नीरज मिश्र ने अपने मधुर सितार वादन से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय संगीत की गहराई और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय दिखाई दिया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके बाद डॉ. सरोज वर्मा और विदुषी वर्मा ने भजन गायन प्रस्तुत किया। दोनों कलाकारों की सुमधुर आवाज में प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और वातावरण में भक्ति रस का संचार हुआ। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रार्थना सिंह एवं उनके समूह द्वारा सामूहिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस नृत्य के माध्यम से देवी उपासना और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का सजीव चित्रण किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या श्रृंखला नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक प्रतिदिन आयोजित की जा रही है। यह आयोजन मंदिर न्यास के अधिकारियों के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है, जो काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को और समृद्ध कर रहा है।