'अगले 10 साल में काशी-मथुरा होंगे मुक्त' – विश्व हिन्दू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष का गोवा में बड़ा बयान
पणजी/वाराणसी। गोवा के फोंडा स्थित रामनाथी आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आलोक कुमार ने काशी और मथुरा को लेकर बड़ा बयान दिया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि कानूनी रूप से हिंदू पक्ष मजबूत है और उन्हें विश्वास है कि जिस तरह अयोध्या श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हुआ, उसी तरह अगले 10 वर्षों में काशी और मथुरा भी “मुक्त” हो जाएंगे।
‘संत दर्शन और संवाद’ अभियान के तहत हुआ दौरा
आलोक कुमार गोवा के फोंडा स्थित रामनाथी आश्रम में ‘संत दर्शन और संवाद’ अभियान के तहत पहुंचे थे। यहां सनातन संस्था द्वारा आयोजित सत्कार समारोह में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए और विभिन्न धार्मिक विषयों पर चर्चा की।
“आने वाली शताब्दी हिंदुओं की होगी”
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और आने वाला समय हिंदू धर्म और भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा। उनके अनुसार, पहले रूस और फिर अमेरिका का प्रभाव रहा, लेकिन अब बदलाव का दौर चल रहा है और आने वाली शताब्दी हिंदुओं की होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में छोटे-बड़े संगठन हिंदू धर्म के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं और विहिप भी ‘घर वापसी’ जैसे अभियानों के माध्यम से समाज को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
परिवार और संस्कारों पर जताई चिंता
आलोक कुमार ने परिवारों में घटते संवाद और कमजोर होते संस्कारों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में पारिवारिक मूल्यों में गिरावट आई है, जिसे सुधारने के लिए विहिप विभिन्न कार्यक्रम चला रही है। साथ ही वेदों के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
सनातन संस्था के कार्यों की सराहना
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनातन संस्था की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जहां विहिप स्थूल स्तर पर कार्य करती है, वहीं सनातन संस्था सूक्ष्म स्तर पर आध्यात्मिक मार्गदर्शन का कार्य कर रही है, जो समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
इस अवसर पर विहिप और सनातन संस्था से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारी और संत उपस्थित रहे। सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस ने अतिथियों को आश्रम में चल रहे धार्मिक और सामाजिक कार्यों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान सनातन संस्था के प्रबंधकीय ट्रस्टी वीरेंद्र मराठे ने आलोक कुमार को शाल, श्रीफल और ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया।
धार्मिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बना कार्यक्रम
यह आयोजन धार्मिक, सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर चर्चा का केंद्र रहा, जिसमें भविष्य की दिशा और समाज में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।