काशी कोतवाल कालभैरव का भव्य श्रृंगार, विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए हुई विशेष पूजा 

काशी कोतवाल बाबा काल भैरव मंदिर में गुरुवार को विशेष अलंकार एवं दिव्य श्रृंगार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर देश, समाज, विश्व शांति, सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की कामना करते हुए विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। बाबा के भव्य श्रृंगार के दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
 

वाराणसी। काशी कोतवाल बाबा काल भैरव मंदिर में गुरुवार को विशेष अलंकार एवं दिव्य श्रृंगार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर देश, समाज, विश्व शांति, सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की कामना करते हुए विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। बाबा के भव्य श्रृंगार के दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंदिर के उपमहंत अवधेश पांडे 'कल्लू महाराज' ने बताया कि बाबा काल भैरव का यह विशेष श्रृंगार राष्ट्र और विश्व के कल्याण की भावना से किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में विशेष पूजा के माध्यम से सभी के लिए सद्बुद्धि, सकारात्मक विचार और आपसी सद्भाव की प्रार्थना की गई है, ताकि समाज में शांति और समरसता का वातावरण बना रहे तथा राष्ट्र निरंतर विकास के मार्ग पर अग्रसर हो।

उपमहंत ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन से पहले या बाद में बाबा काल भैरव के दर्शन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बाबा काल भैरव के दर्शन, पूजन और स्मरण से भक्तों के भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा उन्हें बाबा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

उन्होंने काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वनाथ खंड का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस क्षेत्र में देह त्याग करने वाले श्रद्धालुओं पर बाबा काल भैरव की विशेष कृपा रहती है और उन्हें उनके कर्मों के अनुरूप मार्गदर्शन तथा मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने बाबा काल भैरव के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए दर्शन-पूजन की विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं।