काशी की लता' मंगला कपूर को मिला पद्मश्री, बोलीं- 12 साल की उम्र में तेजाब हमले ने बदल दी थी जिंदगी, संगीत बना संजीवनी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज और अद्भुत साधना से विशेष पहचान बनाने वाली "काशी की लता" के नाम से प्रसिद्ध वरिष्ठ शास्त्रीय गायिका मंगला कपूर को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि पर उन्होंने इसे अपने जीवन के लंबे संघर्ष, धैर्य और संगीत साधना का परिणाम बताया। सम्मान मिलने के बाद भावुक हुईं मंगला कपूर ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन रहा, लेकिन संगीत ने उन्हें हर कठिनाई से लड़ने की शक्ति दी।
 

वाराणसी। भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज और अद्भुत साधना से विशेष पहचान बनाने वाली "काशी की लता" के नाम से प्रसिद्ध वरिष्ठ शास्त्रीय गायिका मंगला कपूर को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि पर उन्होंने इसे अपने जीवन के लंबे संघर्ष, धैर्य और संगीत साधना का परिणाम बताया। सम्मान मिलने के बाद भावुक हुईं मंगला कपूर ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन रहा, लेकिन संगीत ने उन्हें हर कठिनाई से लड़ने की शक्ति दी।

उन्होंने कहा, "मैं अपनी खुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती। मेरे जैसी महिला के लिए पद्मश्री तक पहुंचना कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने हर कठिन दौर में मेरा साथ दिया।"

12 वर्ष की उम्र में एसिड अटैक ने बदल दी जिंदगी
मंगला कपूर का जीवन साहस और संघर्ष की प्रेरणादायक मिसाल है। वह एक एसिड अटैक सर्वाइवर हैं। महज 12 वर्ष की उम्र में उन पर तेजाब से हमला कर दिया गया था। बाद में जांच में सामने आया कि यह हमला परिवार से जुड़ी व्यावसायिक रंजिश का परिणाम था, जिसे घर के एक नौकर के माध्यम से अंजाम दिलाया गया।

इस दर्दनाक घटना में उनका चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलस गया। अगले छह वर्षों तक उनका लगातार इलाज चला। यह समय उनके लिए केवल शारीरिक पीड़ा का नहीं, बल्कि मानसिक अवसाद और सामाजिक उपेक्षा का भी दौर था। मंगला कपूर आज भी उस घटना को याद करते हुए भावुक हो जाती हैं। उन्होंने कहा, "जब भी उस दिन को याद करती हूं तो आंखों में आंसू आ जाते हैं और पूरा शरीर सिहर उठता है।"

समाज की संवेदनहीनता ने भी पहुंचाई गहरी चोट
एसिड अटैक के बाद उन्हें केवल शारीरिक दर्द ही नहीं सहना पड़ा, बल्कि समाज की उपेक्षा और तानों का भी सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया, मानो गलती उनकी ही हो। लगातार सर्जरी के बाद जब उनका चेहरा कुछ सामान्य हुआ तो उनके पिता ने उन्हें दोबारा स्कूल भेजा। लेकिन आठवीं कक्षा में सहपाठियों द्वारा उनका मजाक उड़ाया गया, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा और उनका नर्वस ब्रेकडाउन हो गया। उन्होंने बताया, "मैं वहीं पसीने से भीगकर गिर पड़ी। उस घटना के बाद फिर कभी स्कूल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।"

बाद में उन्होंने घर पर रहकर अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। इस कठिन दौर में उनके पिता ने उनका मनोबल बनाए रखा और लगातार यह विश्वास दिलाया कि इस हादसे में उनकी कोई गलती नहीं है और उन्हें जीवन से हार नहीं माननी चाहिए।

37 सर्जरी के बाद संगीत बना नई जिंदगी का आधार
मंगला कपूर के शरीर की अब तक 37 सर्जरी हो चुकी हैं। वर्षों तक इलाज और मानसिक संघर्ष झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने संगीत को अपना सहारा बनाया और उसी में अपने जीवन का नया उद्देश्य खोजा। उनका कहना है कि संगीत ने उन्हें जीने की नई ऊर्जा दी, आत्मविश्वास लौटाया और संघर्षों से बाहर निकलने की शक्ति प्रदान की। वह संगीत को अपनी "संजीवनी" मानती हैं।

मंदिर के भजन से शुरू हुआ सफलता का सफर
कॉलेज के दिनों में एक मंदिर में भजन गाते समय लोगों ने पहली बार उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना। उनकी मधुर और प्रभावशाली आवाज ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्हें विभिन्न सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने के अवसर मिलने लगे। धीरे-धीरे उनकी पहचान उनके चेहरे से नहीं, बल्कि उनकी आवाज से बनने लगी। देशभर में उनके शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम आयोजित होने लगे और वह भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत का सम्मानित नाम बन गईं।

तीन दशक तक बीएचयू में दी संगीत की शिक्षा
ग्वालियर घराने की प्रतिष्ठित गायिका मंगला कपूर ने वर्ष 1989 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य शुरू किया। लगभग 30 वर्षों तक उन्होंने संगीत के विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने देशभर में अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया और भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाया। संगीत के अलावा वह दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए भी लगातार कार्य करती हैं तथा लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही हैं।

संघर्ष से सम्मान तक का सफर
पद्मश्री से सम्मानित होने के बाद मंगला कपूर की जीवन यात्रा इस बात का प्रमाण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी किसी व्यक्ति के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। एसिड अटैक की पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा और वर्षों तक चले उपचार के बावजूद उन्होंने संगीत को अपनी ताकत बनाया और आज देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री प्राप्त कर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।