अस्सी घाट पर ‘काशी चैती उत्सव 2026’ का भव्य आयोजन, लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति से गूंजा माहौल

अस्सी घाट स्थित ‘सुबह-ए-बनारस’ मंच पर रविवार को ‘काशी चैती उत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट एवं संस्कार भारती, काशी महानगर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा ‘चैती’ गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
 

वाराणसी। अस्सी घाट स्थित ‘सुबह-ए-बनारस’ मंच पर रविवार को ‘काशी चैती उत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट एवं संस्कार भारती, काशी महानगर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा ‘चैती’ गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह वीरेंद्र जायसवाल रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक अग्रवाल और राज मयंक गोयल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट की मुख्य न्यासी सरोज वर्मा ने सभी अतिथियों और दर्शकों का स्वागत करते हुए अपने संबोधन में ‘चैती’ जैसे लोकगीतों के धीरे-धीरे लुप्त होते स्वरूप पर चिंता जताई। उन्होंने इन लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट निरंतर विभिन्न कार्यशालाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को लोक कला से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।

उत्सव में लोकायन कला केंद्र के शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं के समूह सहित कई कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में देवी गीत “जगदंबा घर में दीयना बार आई”, चैती “तोरी मीठी बोली कोयलिया हो रामा” जैसे गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इसके अलावा, नीरज पांडे ने शिव स्तुति और ठुमरी प्रस्तुत की, वहीं सरोज वर्मा ने लोक भजन और विभिन्न चैती गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया। नगेंद्र शर्मा और दुगेश उपाध्याय ने भी चैती, दादरा, सोहर और यात्रा गीतों की प्रस्तुतियां देकर लोकसंगीत की विविधता को जीवंत कर दिया।

संगत में हारमोनियम पर अरुण अस्थाना, तबले पर शशिकांत द्विवेदी, नाल पर सुभाष कनौजिया, शहनाई पर सुनील प्रसन्ना और साइड इफेक्ट्स पर संजय श्रीवास्तव ने कलाकारों का साथ दिया।

कार्यक्रम का संचालन जगदीश्वरी चौबे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राकेश कुमार मिड्ढा ने प्रस्तुत किया। यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और लोक संगीत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।