काशी में कपि-वन होगा विकसित,बंदरों के आतंक से मिलेगी मुक्ति
कपि-वन में बंदरों को मिलेगा प्राकृतिक आवास एवं भोजन
कपि-वन बनेगा समाधान, मानव-वानर संघर्ष और बंदरों के हमलों में आएगी कमी
कपि वन योजना में शहरों की आबादी से बाहर बड़े पैमाने पर फलदार एवं छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे
पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार ,जैव विविधता के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी वन
वाराणसी। जंगलों के कटने और पेड़ों की घटती संख्या के कारण बंदरों का प्राकृतिक आवास तेजी से सिमट रहा है। भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में कपि अक्सर रिहायशी इलाकों का रुख कर लेते हैं। आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने के बाद कई बार बंदर मनुष्यो पर हमलावर हो जाते है, मानव-वानर संघर्ष की बढ़ती समस्या को देखते हुए योगी सरकार बंदरों के लिए विशेष कपि वन विकसित करने जा रही है। इन वनों में बंदरों को उनका प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा, साथ ही उनके पसंदीदा फलदार वृक्ष भी लगाए जाएंगे ताकि उन्हें भोजन के लिए आबादी वाले क्षेत्रों में न भटकना पड़े। कपि वन में बंदरों को प्राकृतिक आवास और पर्याप्त भोजन दोनों की व्यवस्था मिलेगी। कपि वन की स्थापना का कार्य जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की तैयारी है।
प्रभागीय वन अधिकारी निधि चौहान ने बताया कि "कपि वन" योजना के तहत शहरों की आबादी से बाहर बड़े पैमाने पर फलदार एवं छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। इनमें बड़हल, आम, जामुन, अमरूद, बेल, गुलर, कटहल, बेर, शहतूत, पीपल और अंजीर जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। ये वृक्ष बंदरों के पसंदीदा भोजन का स्रोत हैं और उन्हें प्राकृतिक रूप से भोजन उपलब्ध कराने में सहायक होंगे।
प्रभागीय वन अधिकारी ने जानकारी दिया कि जब बंदरों को उनके प्राकृतिक परिवेश में ही पर्याप्त भोजन और आश्रय मिलेगा तो उनका रुख आबादी वाले क्षेत्रों की ओर कम होगा। इससे शहरों में बंदरों के उत्पात और हमलों की घटनाओं में कमी आएगी तथा लोगों को राहत मिलेगी। पहल न केवल मानव-वानर संघर्ष को कम करने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और जैव विविधता के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योगी सरकार की यह योजना वन्य जीवों और मनुष्यों के बीच बेहतर सहअस्तित्व स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कपि वन विकसित होने के बाद बंदरों को उनका प्राकृतिक घर और भोजन दोनों उपलब्ध होंगे, जिससे शहरों और गांवों में मानव-वानर संघर्ष की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।