काशी विश्वनाथ धाम में कलश स्थापना, अपने-अपने क्षेत्रों की अग्रणी मातृशक्ति बनी याजक, नवरात्र में शिव के धाम में शक्ति की अद्भुत उपासना 

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में इस बार एक विशेष और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जहां महिलाओं ने स्वयं याजक बनकर विधि-विधान से कलश स्थापना का अनुष्ठान संपन्न किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान और उनके नेतृत्व को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
 

वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में इस बार एक विशेष और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जहां महिलाओं ने स्वयं याजक बनकर विधि-विधान से कलश स्थापना का अनुष्ठान संपन्न किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान और उनके नेतृत्व को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

 

सनातन परंपरा में महिलाओं को शक्ति स्वरूप माना जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए धाम में इस बार मातृशक्ति को प्रमुख भूमिका दी गई। विभिन्न क्षेत्रों से आईं महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ देवी कलश की स्थापना कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

 इस विशेष आयोजन में देश-प्रदेश की प्रतिष्ठित महिलाओं ने भागीदारी की। प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मालिनी अवस्थी अवधी, बुंदेली और भोजपुरी लोकगीतों के लिए जानी जाती हैं। वहीं आध्यात्मिक क्षेत्र से मुक्तेश्वरी गिरी ने भाग लेकर धार्मिक चेतना का संदेश दिया।

 

चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. शिप्रा धर, खेल जगत से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नीलू मिश्रा तथा सामाजिक सेवा क्षेत्र से ललिता मोदी और रजनी शर्मा की सहभागिता उल्लेखनीय रही। शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से सिद्धिदात्री भारद्धाज तथा पत्रकारिता से दामिनी वशिष्ठ ने भी इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके साथ ही गृहिणी के रूप में संगीता कुमारी की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि हर क्षेत्र की महिला समाज निर्माण में समान रूप से महत्वपूर्ण है।

 

मंदिर न्यास द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम नारी सशक्तिकरण, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम बनकर उभरा। इस पहल ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाएं न केवल समाज की आधारशिला हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक नेतृत्व में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।