जन्माष्टमी की झांकी में दिखा बदलता बनारस, रोपवे और वंदे भारत के साथ काशी की संस्कृति का संगम
औसानगंज में कृष्ण कुमार गुप्ता ने तैयार की अनोखी झांकी, डेढ़ महीने से अधिक समय लगा, कृष्ण लीला के साथ विकास कार्यों को भी दिया स्थान
काशी में जन्माष्टमी पर आकर्षण बनी अनोखी झांकी, रोपवे के गंडोले से लेकर वंदे भारत ट्रेन तक की झलक
काशी विश्वनाथ और मथुरा-वृंदावन के मंदिरों के मॉडल भी शामिल, रोपवे के गंडोले को काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर से संचालित होते दिखाया
वंदे भारत ट्रेन के मॉडल के जरिए रेलवे के आधुनिक स्वरूप को दर्शाया, लड्डू गोपाल के साथ गोपियों की रासलीला और कृष्ण लीला की झलक भी शामिल
वाराणसी। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर घरों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित झांकियां सजाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। देशभर में कृष्ण भक्त अपने-अपने घरों में झांकियां बनाकर कान्हा की भक्ति में रंग जाते हैं। वाराणसी के औसानगंज स्थित एक घर में इस बार तैयार की गई जन्माष्टमी की झांकी अपनी अलग थीम को लेकर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें श्रीकृष्ण की भक्ति और काशी की धार्मिक संस्कृति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को भी झांकी का हिस्सा बनाया गया है।
झांकी में एक ओर भगवान श्रीकृष्ण, लड्डू गोपाल और गोपियों की रासलीला के दृश्य नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर बदलते बनारस और आधुनिक भारत की तस्वीर दिखाई गई है। रोपवे के गंडोले को काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर से संचालित होते हुए दिखाया गया है। वहीं, वंदे भारत ट्रेन के मॉडल के जरिए रेलवे में हो रहे बदलाव को दर्शाया गया है। झांकी में पुरातन मंदिरों के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर, अक्षरधाम, मथुरा और वृंदावन के मंदिरों के मॉडल भी बनाए गए हैं। इस तरह धार्मिक आस्था, कृष्ण भक्ति, काशी की संस्कृति और विकास कार्यों को एक ही झांकी में समाहित करने का प्रयास किया गया है।
झांकी तैयार करने वाले कृष्ण भक्त कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि इसमें बदलते भारत की तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि रोपवे और वंदे भारत समेत प्रधानमंत्री मोदी की ओर से किए गए विकास कार्यों को झांकी में स्थान दिया गया है। इसे तैयार करने में डेढ़ महीने से अधिक समय लगा। जन्माष्टमी के मौके पर तैयार की गई इस अनोखी झांकी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी है। कृष्ण भक्ति के साथ विकास और संस्कृति का समावेश होने के कारण यह झांकी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।