इस्कॉन टेंपल में भव्य जन्माष्टमी महोत्सव, 51 पवित्र द्रव्यों से हुआ श्रीकृष्ण का महाभिषेक
24 घंटे अखंड हरिनाम संकीर्तन से गूंजा दुर्गाकुंड स्थित मंदिर, मध्यरात्रि में कृष्ण प्राकट्य पर उमड़ा भक्ति का सैलाब
पुष्प सज्जा और विशेष श्रृंगार ने बढ़ाई मंदिर की भव्यता, महाभिषेक के बाद हुई आरती; प्रसादम और अन्नदान से श्रद्धालुओं की सेवा
24 घंटे चला अखंड नॉन-स्टॉप हरिनाम संकीर्तन, 51 प्रकार के पवित्र द्रव्यों से भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक
मध्यरात्रि में जयकारों और महामंत्र संकीर्तन के बीच हुआ कृष्ण प्राकट्य, आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्रों के विशुद्ध बैंड ने कीर्तन से बांधा समां
श्रद्धालुओं के लिए प्रसादम और अन्नदान की रही विशेष व्यवस्था, 5 सितंबर को होगा नंदोत्सव और श्रील प्रभुपाद का प्राकट्य दिवस
वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) वाराणसी में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण के पावन प्राकट्य दिवस जन्माष्टमी का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया गया। दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और आगंतुकों की भीड़ पहुंचती रही। मंदिर परिसर में दिनभर हरिनाम संकीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा। मंदिर अध्यक्ष अच्युत मोहन प्रभु के मार्गदर्शन में आयोजित महोत्सव में भक्तों और स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग किया।
जन्माष्टमी से पहले ही मंदिर में विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्रों द्वारा गठित विशुद्ध बैंड की ओर से भक्तिमय कीर्तन प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा प्रवचन और भक्ति सेवाओं ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़े रखा।
51 द्रव्यों से हुआ महाभिषेक
जन्माष्टमी के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में भगवान श्रीकृष्ण का विशेष महाभिषेक हुआ। विधि-विधान के साथ 51 प्रकार के पवित्र द्रव्यों से भगवान के विग्रह का अभिषेक किया गया। विभिन्न फूलों और रजत कलशों से किए गए महाभिषेक के दौरान मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन से गूंजता रहा।
महाभिषेक के बाद भव्य आरती हुई। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के प्राकट्य का समय आते ही मंदिर परिसर हरे कृष्ण महामंत्र और जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने संकीर्तन और भजन के बीच भगवान के जन्मोत्सव का स्वागत किया।
प्रसादम और अन्नदान से की सेवा
जन्माष्टमी पर इस्कॉन की ओर से प्रसादम और अन्नदान की विशेष व्यवस्था की गई। मंदिर पहुंचे भक्तों और आगंतुकों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सहयोग किया।
जन्माष्टमी महोत्सव के अगले क्रम में 5 सितंबर को नंदोत्सव और इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद का प्राकट्य दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम, कीर्तन, प्रवचन और भक्ति सेवाएं आयोजित होंगी। आयोजन में अच्युत मोहन दास, साक्षी मुरारी दास, रसिक गोविंद दास, रामकेशव दास, मुरारी दास गुप्त समेत बड़ी संख्या में भक्तों और स्वयंसेवकों का सहयोग रहा।