चंद्रावती गांव से जैन सर्किट को मिलेगी नई पहचान, 17.06 करोड़ की लागत से बन रहा आधुनिक घाट
वाराणसी। गंगा तट पर स्थित चंद्रावती गांव जल्द ही जैन सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में नई पहचान पाने जा रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से यहां 17.06 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तीन-स्तरीय घाट का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका लगभग 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली माने जाने वाले इस स्थल पर करीब 200 मीटर लंबे घाट का निर्माण किया गया है, जिसे शीघ्र ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। यह घाट काशी के अन्य प्रमुख घाटों की तुलना में अधिक शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करेगा, जिससे यहां पर्यटन को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
परियोजना को एक आधुनिक रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया गया है। घाट पर सीढ़ियों के साथ-साथ शौचालय, चेंजिंग रूम, साइनेज, पार्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त हेरिटेज लाइटिंग, पत्थर की बेंच, जालीदार रेलिंग और हरित क्षेत्र इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना न केवल जैन धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। काशी के मुख्य घाटों से आगे बढ़ते हुए यह स्थल आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा।
चंद्रावती जैन धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि भगवान चंद्रप्रभु का जन्म यहीं हुआ था और उन्होंने गंगा तट पर तपस्या कर ज्ञान प्राप्त किया। यहां स्थित प्राचीन मंदिर भी करीब 500 वर्षों से अधिक पुराना बताया जाता है, जो इस स्थल की ऐतिहासिकता को दर्शाता है।