काशी में जय विश्वनाथ संग गूंजेगा जय जगन्नाथ, बनेगा भव्य जगन्नाथ कॉरिडोर, शुरू हुआ निर्माण 

धर्म और अध्यात्म की नगरी वाराणसी में अब “जय विश्वनाथ” के साथ “जय जगन्नाथ” की गूंज भी सुनाई देने वाली है। शहर के अस्सी क्षेत्र में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर को भव्य स्वरूप देने के लिए जगन्नाथ कॉरिडोर निर्माण परियोजना का कार्य शुरू हो गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का फर्स्ट लुक सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।
 

रिपोर्ट: ओमकार नाथ

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी वाराणसी में अब “जय विश्वनाथ” के साथ “जय जगन्नाथ” की गूंज भी सुनाई देने वाली है। शहर के अस्सी क्षेत्र में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर को भव्य स्वरूप देने के लिए जगन्नाथ कॉरिडोर निर्माण परियोजना का कार्य शुरू हो गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का फर्स्ट लुक सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।

प्रस्तावित कॉरिडोर आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक स्थापत्य कला का अद्भुत संगम होगा। करीब एक लाख वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र में विकसित होने वाले इस परिसर में मुख्य भगवान जगन्नाथ मंदिर के साथ गरुड़ मंदिर, नरसिंह मंदिर सहित अन्य देव विग्रह स्थापित किए जाएंगे। मुख्य मंदिर का शिखर लगभग 108 फीट ऊंचा होगा, जिसकी भव्यता गंगा तट से भी दिखाई देगी। परिसर में हरियाली, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए शांत वातावरण विकसित किया जाएगा।

कॉरिडोर के निर्माण में धौलपुर के विशेष पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। लाल, गुलाबी और सफेद रंग के ये पत्थर अपनी मजबूती और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं, जिससे पूरे परिसर को पारंपरिक और आकर्षक स्वरूप मिलेगा। सौंदर्य और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में गार्डन और फाउंटेन विकसित किए जाएंगे। साथ ही परिसर में स्थित प्राचीन कुंड का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और आध्यात्मिक माहौल मिल सके।

इस परियोजना का शिलान्यास 1 मई को किया जा चुका है और इसे तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अनुमान है कि दिसंबर 2029 तक कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। पहले चरण में करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि शेष राशि श्रद्धालुओं के सहयोग से जुटाई जाएगी।

जगन्नाथ कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसमें गुरुकुल, धर्मशाला, कौशल विकास केंद्र, औषधि केंद्र, पार्किंग और अन्नक्षेत्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि वाराणसी में आध्यात्मिक पर्यटन को भी नया आयाम देगी।