लक्ष्मी कुंड के जीर्णोद्धार में अनियमितता, महापौर के निरीक्षण में खुली पोल, अफसरों को लगाई फटकार 

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले लक्ष्मी कुंड के जीर्णोद्धार कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नगर निगम द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के तहत लगभग 3.57 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे इस कार्य का सोमवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी ने औचक निरीक्षण किया। मौके की स्थिति देखकर उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर कड़ी नाराजगी जताई।
 

वाराणसी। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले लक्ष्मी कुंड के जीर्णोद्धार कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नगर निगम द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के तहत लगभग 3.57 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे इस कार्य का सोमवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी ने औचक निरीक्षण किया। मौके की स्थिति देखकर उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर कड़ी नाराजगी जताई।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कार्यदायी संस्था द्वारा मानकों की अनदेखी करते हुए काम किया जा रहा है। सबसे गंभीर लापरवाही कुंड के चारों ओर स्थित पुराने खंभों के साथ देखी गई। इन खंभों की न तो उचित सफाई की गई और न ही मरम्मत, बल्कि उन पर जमी धूल और गंदगी के ऊपर ही सीधे रंग पोत दिया गया। इसे देख महापौर ने इसे “खानापूर्ति” करार दिया और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।

इसके अलावा, कुंड के सुंदरीकरण के तहत लगाए गए नए पत्थरों में भी खामियां सामने आईं। कई स्थानों पर अभी से पानी का रिसाव (सीपेज) दिखाई दे रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो गए हैं। महापौर ने पत्थरों की जोड़ाई और फिनिशिंग पर भी असंतोष जताते हुए स्पष्ट कहा कि इस तरह का निम्नस्तरीय कार्य किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस मामले को एक दिन पहले, 22 मार्च को, क्षेत्रीय पार्षद राम गोपाल वर्मा ने नगर निगम की सदन बैठक में उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जीर्णोद्धार कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है और कार्यदायी संस्था मनमाने ढंग से काम कर रही है। इसी शिकायत के आधार पर महापौर ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता आर.के. सिंह भी मौजूद रहे। महापौर ने उन्हें निर्देश दिया कि पूरे कार्य की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि कुंड के पानी का ट्रीटमेंट आधुनिक मानकों के अनुरूप हो, ताकि जल स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे। 

महापौर ने चेतावनी दी कि यदि कार्य की गुणवत्ता में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो संबंधित संस्था का भुगतान रोक दिया जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।