आईएमएस-बीएचयू में इंक्रीमेंट विवाद गहराया, नर्सिंग अधिकारियों को नियम विरुद्ध लाभ देने के आरोप
वाराणसी। आईएमएस-बीएचयू में आउटसोर्सिंग भर्ती को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब नर्सिंग अधिकारियों को दिए गए अतिरिक्त इंक्रीमेंट का मामला भी चर्चा में आ गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि भर्ती नियमों और निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए कई नर्सिंग अधिकारियों को अतिरिक्त नॉन-एब्जॉर्बेबल इंक्रीमेंट का लाभ प्रदान किया गया। मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि बीएचयू में वर्ष 2005 से स्टाफ नर्स की भर्ती के लिए बीएससी नर्सिंग योग्यता अनिवार्य की गई थी। नियमानुसार किसी कर्मचारी को विशेष परिस्थितियों में ही सीमित संख्या में अतिरिक्त नॉन-एब्जॉर्बेबल इंक्रीमेंट दिए जा सकते हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में इन नियमों का पालन किए बिना ही अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रदान किया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही पड़ताल के दौरान इस मामले से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया और सेवा लाभों से संबंधित निर्णयों की समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियों ने विभिन्न स्तरों पर संबंधित लोगों से पूछताछ कर दस्तावेजों और प्रशासनिक निर्णयों की जानकारी जुटाई है।
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कई बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की गई है। कुछ पूर्व और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हालांकि जांच एजेंसियों या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आईएमएस-बीएचयू में कार्यरत 700 से अधिक नर्सिंग अधिकारियों में बड़ी संख्या राजस्थान के विभिन्न संस्थानों से आई है। भर्ती प्रक्रिया और सेवा लाभों को लेकर पूर्व में भी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन अब जांच एजेंसियों की सक्रियता के कारण मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ताओं ने बीएचयू के कुलपति से संबंधित इंक्रीमेंट लाभों पर रोक लगाने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक विवादित मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सके।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस नए विवाद पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जांच जारी है और किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है।