काला-जार के इलाज की नई राह तलाश रहे आईआईटी-बीएचयू के प्रो. विकास दुबे को एनएएमएस फेलोशिप

काला-जार जैसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के उपचार और दवा प्रतिरोध की चुनौती से निपटने की दिशा में शोध कर रहे आईआईटी-बीएचयू के प्रो. विकास कुमार दुबे को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस), इंडिया का फेलो चुना गया है। जैव चिकित्सा अनुसंधान, प्रोटीन जैव रसायन और दवा खोज के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया है। आईआईटी-बीएचयू के वर्तमान संकाय सदस्यों में वह इस फेलोशिप से सम्मानित होने वाले एकमात्र सदस्य हैं।
 

दवा प्रतिरोध और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों पर शोध को मिली राष्ट्रीय पहचान, 180 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित

वाराणसी। काला-जार जैसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के उपचार और दवा प्रतिरोध की चुनौती से निपटने की दिशा में शोध कर रहे आईआईटी-बीएचयू के प्रो. विकास कुमार दुबे को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस), इंडिया का फेलो चुना गया है। जैव चिकित्सा अनुसंधान, प्रोटीन जैव रसायन और दवा खोज के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया है। आईआईटी-बीएचयू के वर्तमान संकाय सदस्यों में वह इस फेलोशिप से सम्मानित होने वाले एकमात्र सदस्य हैं।

दवा प्रतिरोध पर केंद्रित है शोध
स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग में कार्यरत प्रो. दुबे का शोध विशेष रूप से आंत संबंधी लीशमैनियासिस यानी काला-जार के आणविक जीव विज्ञान और दवा प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए नई उपचार रणनीतियां विकसित करने पर केंद्रित है। काला-जार एक गंभीर उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग है। इसके उपचार में दवाओं के प्रति परजीवी में विकसित होने वाला प्रतिरोध बड़ी चुनौती माना जाता है।

प्रो. दुबे अपने शोध के माध्यम से परजीवी के व्यवहार, प्रोटीन के कार्य और कोशिकीय प्रक्रियाओं को आणविक स्तर पर समझने का प्रयास कर रहे हैं। उनके शोध में कोशिका मृत्यु की प्रक्रिया और आणविक परजीवी विज्ञान का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इन अध्ययनों के जरिए दवा प्रतिरोधी संक्रमणों से निपटने के संभावित विकल्पों की तलाश की जा रही है।


अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 180 से अधिक शोध पत्र
प्रो. विकास कुमार दुबे के अकादमिक और शोध करियर में अब तक 180 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नाम भारत और अमेरिका में कई पेटेंट भी दर्ज हैं। उन्होंने अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और देश-विदेश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों के साथ मिलकर सहयोगात्मक अनुसंधान किया है।

 

उनका शोध बुनियादी विज्ञान और रोगों के उपचार के बीच संबंध स्थापित करने पर केंद्रित रहा है। विशेष रूप से उपेक्षित रोगों के लिए दवा खोज और दवा प्रतिरोध की समस्या पर उनके कार्यों को इस सम्मान के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

संस्थान में निभा चुके हैं कई अहम जिम्मेदारियां
शोध के साथ-साथ प्रो. दुबे आईआईटी-बीएचयू में शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्व भी संभाल चुके हैं। वह डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट), एसोसिएट डीन (एकेडमिक अफेयर्स) और स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के समन्वयक रह चुके हैं। वर्तमान में वह सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेंटर के समन्वयक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

निदेशक ने दी बधाई
आईआईटी-बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने प्रो. दुबे को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान प्रो. दुबे के वैज्ञानिक योगदान के साथ पूरे संस्थान और वैज्ञानिक समुदाय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे संस्थान में उच्च प्रभाव वाले जैव चिकित्सा अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा और वैश्विक स्तर पर आईआईटी-बीएचयू की पहचान मजबूत होगी।