वीवीआईपी सुरक्षा को लेकर वाराणसी में हाईलेवल मॉक ड्रिल, एनएसजी समेत कई एजेंसियों ने लिया भाग, परखी गई तैयारी
वाराणसी। वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वाराणसी में हाईलेवल मॉक ड्रिल आयोजित की गई। एडीजी सिक्योरिटी के निर्देश पर आयोजित इस अभ्यास में एनएसजी कमांडो समेत केंद्रीय एवं स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल के दौरान वीवीआईपी मूवमेंट, भीड़ प्रबंधन, रूट डायवर्जन और मेडिकल इमरजेंसी सहित विभिन्न परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखा गया।
मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड से सर्किट हाउस, काल भैरव मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम तक निर्धारित मार्ग पर ट्रैफिक को पूरी तरह जीरो कर सुरक्षा व्यवस्था का अभ्यास किया गया। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की टीमों ने अपने-अपने निर्धारित दायित्वों के अनुसार कार्रवाई की। इस दौरान यह देखा गया कि किसी संभावित अप्रिय घटना की स्थिति में विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित कर सकती हैं।
अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा ने बताया कि कुछ प्रमुख शहरों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई है। इसका उद्देश्य वीवीआईपी मूवमेंट, स्थानीय तीज-त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान एनएसजी समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में सभी एजेंसियां अपने निर्धारित रोल के अनुसार तेजी से कार्रवाई करें, इसी उद्देश्य से यह रिहर्सल कराया गया।
उन्होंने बताया कि एनएसजी के डीआईजी समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी वाराणसी पहुंचे थे। सबसे पहले अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ब्रीफिंग की गई। इसके बाद निर्धारित परिदृश्य के अनुसार मॉक ड्रिल कराई गई। अभ्यास पूरा होने के बाद डी-ब्रीफिंग सेशन आयोजित किया गया, जिसमें पूरी कार्रवाई की समीक्षा की गई और सामने आई कमियों को चिन्हित किया गया।
मॉक ड्रिल में स्थानीय भीड़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए रूट को जीरो करने, विभिन्न टीमों की तैनाती और उनके रिस्पांस टाइम का अभ्यास किया गया। प्रत्येक टीम को संभावित घटना की स्थिति में उसकी भूमिका और जिम्मेदारी के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। एसीपी ने कहा कि अभ्यास के दौरान जो भी कमियां सामने आई हैं, उनमें आवश्यक सुधार किया जाएगा। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य वास्तविक आपात स्थिति में सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर त्वरित, प्रभावी और व्यवस्थित रिस्पांस सुनिश्चित करना है।