हाई बीपी से आंखों की नसों पर संकट, BHU में हर माह पहुंच रहे 100 से अधिक मरीज

हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) का असर अब सिर्फ हृदय और किडनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आंखों की रोशनी पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। लंबे समय तक अनियंत्रित बीपी रहने से आंखों की रेटिना की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे नसों के सिकुड़ने, रक्त प्रवाह बाधित होने, सूजन और रक्तस्राव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। चिकित्सकीय भाषा में इसे हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहते हैं।
 

40 की उम्र में भी बढ़ा खतरा, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर से रेटिना को नुकसान और रोशनी जाने का अंदेशा

रिपोर्ट : ओमकार नाथ

वाराणसी। हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) का असर अब सिर्फ हृदय और किडनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आंखों की रोशनी पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। लंबे समय तक अनियंत्रित बीपी रहने से आंखों की रेटिना की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे नसों के सिकुड़ने, रक्त प्रवाह बाधित होने, सूजन और रक्तस्राव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। चिकित्सकीय भाषा में इसे हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहते हैं।

आईएमएस बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में हर महीने 100 से अधिक मरीज इस तरह की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 80 फीसदी मरीज 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। हालांकि, अब 40 वर्ष की उम्र के मरीजों में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर बीमारी की पहचान और बीपी पर नियंत्रण नहीं होने से आंखों की रोशनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

रेटिना की नसें सिकुड़ने से प्रभावित होता है रक्त प्रवाह
नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लड प्रेशर जितना अधिक और जितने लंबे समय तक अनियंत्रित रहेगा, आंखों को नुकसान पहुंचने का खतरा उतना ही बढ़ेगा। हाई बीपी के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। धीरे-धीरे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और आगे चलकर सूजन, रक्तस्राव तथा नसों में रुकावट की समस्या हो सकती है।

आईएमएस बीएचयू के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. आरपी मौर्य के अनुसार, हाई बीपी से रेटिना की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने के साथ उनमें सूजन आ सकती है। रक्त वाहिकाओं से खून बाहर निकलने लगता है। पर्याप्त रक्त नहीं मिलने पर ऑप्टिक नर्व भी प्रभावित हो सकती है। इससे देखने की क्षमता कम होने और गंभीर स्थिति में दृष्टि जाने का खतरा रहता है।


 

सिरदर्द और धुंधलेपन के साथ पहुंच रहे मरीज
क्षेत्रीय नेत्र संस्थान, बीएचयू के प्रो. दीपक मिश्रा के मुताबिक, कुछ मरीज सिरदर्द, आंखों में दर्द या धुंधला दिखाई देने की शिकायत लेकर ओपीडी पहुंचते हैं। वहीं, मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और कार्डियोलॉजी विभाग से भी हाई बीपी के मरीजों को आंखों की जांच के लिए भेजा जाता है। जांच के दौरान कई मरीजों में हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी की पुष्टि होती है। उनके अनुसार, हर ओपीडी में करीब पांच ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं, जिनकी आंखों की रक्त वाहिकाओं में हाई बीपी के कारण खून जमा होने या रक्तस्राव की समस्या होती है।

गंभीर स्थिति में सर्जरी की भी पड़ सकती है जरूरत
चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई मरीजों को शुरुआत में आंखों की समस्या और हाई बीपी के बीच संबंध का पता नहीं चलता। जब तक वे विशेषज्ञ के पास पहुंचते हैं, तब तक रेटिना को गंभीर नुकसान हो चुका होता है। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि, गंभीर नुकसान होने पर उपचार के बाद भी दृष्टि पूरी तरह वापस आना संभव नहीं होता। ऐसे में नियमित बीपी नियंत्रण और समय पर आंखों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुगलसराय के 61 वर्षीय सीताराम की कम हुई रोशनी
मुगलसराय निवासी 61 वर्षीय सीताराम को कई दिनों से कम दिखाई दे रहा था। आंखों में दर्द की शिकायत भी थी। पिछले सप्ताह वह बीएचयू के नेत्र रोग विभाग पहुंचे। जांच में सामने आया कि आंखों की समस्या के पीछे बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर एक प्रमुख कारण था। इसके बाद उनका उपचार शुरू किया गया।

डेहरी आनसोन के 52 वर्षीय जितेंद्र को हुआ तेज सिरदर्द
डेहरी आनसोन निवासी 52 वर्षीय जितेंद्र को अचानक तेज सिरदर्द हुआ। पहले उन्होंने दर्द की दवा ली, लेकिन आराम नहीं मिला। चिकित्सक से जांच कराने पर उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टर की सलाह पर वह नेत्र रोग विभाग पहुंचे। जांच में आंखों की रक्त वाहिकाओं में खून जमा होने की समस्या सामने आई। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।

बीपी नियंत्रित रखें, नियमित कराएं आंखों की जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित रूप से अपना बीपी जांचें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार उसे नियंत्रित रखें। समय-समय पर आंखों की जांच भी कराते रहें। आंखों की रोशनी कम होने, धुंधला दिखाई देने, अचानक अंधेरा छाने या तेज सिरदर्द जैसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक दृष्टि कम होने या तेज सिरदर्द के साथ अन्य गंभीर लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। समय पर जांच और उपचार से आंखों को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।