हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पहला दीक्षांत समारोह, 728 विद्यार्थियों को मिली उपाधि

वाराणसी। नवाचार, शोध, उद्यमिता और नैतिक मूल्यों के समन्वय से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है। यह विचार बुधवार को हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आनंद कुमार त्यागी, कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने व्यक्त किए। इस ऐतिहासिक अवसर पर सत्र 2022–23 के 728 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिससे महाविद्यालय के शैक्षणिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया।
 

वाराणसी। नवाचार, शोध, उद्यमिता और नैतिक मूल्यों के समन्वय से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है। यह विचार बुधवार को हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आनंद कुमार त्यागी, कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने व्यक्त किए। इस ऐतिहासिक अवसर पर सत्र 2022–23 के 728 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिससे महाविद्यालय के शैक्षणिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया।

पहले दीक्षांत समारोह में उमड़ा गौरव और उत्साह
महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस भव्य और गरिमामय समारोह में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों ने उपाधियां प्राप्त कीं। स्नातक स्तर पर बीए, बीकॉम, बीएससी, बीएड और एलएलबी के 587 विद्यार्थी तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 12 विषयों के 141 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। उपाधि ग्रहण करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास, गर्व और भविष्य के प्रति उत्साह स्पष्ट झलक रहा था।

काशी की बौद्धिक परंपरा से जुड़ने का आह्वान
अपने दीक्षांत संबोधन में प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन के एक नए दायित्व की शुरुआत है। उन्होंने काशी की बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि यह भूमि सदैव विचार, चेतना और नवजागरण की केंद्र रही है। उन्होंने भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्ञान को समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ें।

विकसित भारत के लिए युवाओं की भूमिका अहम
प्रो. त्यागी ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना तभी साकार होगी जब युवा वर्ग शिक्षा को केवल रोजगार का साधन न मानकर सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाएगा। नवाचार, उद्यमिता, शोध और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ते हुए युवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक बदलाव पहुंचाने का संकल्प लेना होगा।

दीक्षांत आत्ममंथन और उत्तरदायित्व का क्षण
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय, कुलसचिव, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने कहा कि दीक्षांत समारोह आत्ममंथन और आत्मदायित्व का अवसर है। आज का विद्यार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में खड़ा है, जहां ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतेंदु युग की चेतना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

अतिथियों का सम्मान और पत्रिका का विमोचन
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रजनीश कुंवर एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश द्वारा अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की पत्रिका ‘ज्योतिष्मती’ का विमोचन भी हुआ। एनसीसी कैडेट्स ने एनसीसी कमांडर डॉ. राम आशीष के नेतृत्व में मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया।

गरिमामय समापन के साथ प्रेरणादायी संदेश
कार्यक्रम का संचालन प्रो. ऋचा सिंह और प्रो. ममता वर्मा ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल ने प्रस्तुत किया। दीक्षांत समारोह का समापन शिक्षा, संस्कृति, युवाशक्ति और विकसित भारत के संकल्प के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी जनों को प्रेरणा और गौरव से भर दिया। 

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