काशी में 28 जुलाई से गुरु पूर्णिमा महोत्सव, तीन दिवसीय आयोजन के साथ शुरू होगा चातुर्मास महाव्रत

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर काशी की आध्यात्मिक परंपरा एक बार फिर भव्य स्वरूप में साकार होगी। श्री काशी धर्मपीठ की ओर से 28 से 30 जुलाई 2026 तक संत रविदास पार्क (रामेश्वर मठ), अस्सी में तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं चातुर्मास्य महाव्रत का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालु गुरु वंदना, सत्संग, धर्मसभा, प्रवचन तथा महाप्रसाद का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
 

वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर काशी की आध्यात्मिक परंपरा एक बार फिर भव्य स्वरूप में साकार होगी। श्री काशी धर्मपीठ की ओर से 28 से 30 जुलाई 2026 तक संत रविदास पार्क (रामेश्वर मठ), अस्सी में तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं चातुर्मास्य महाव्रत का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालु गुरु वंदना, सत्संग, धर्मसभा, प्रवचन तथा महाप्रसाद का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।

आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम का संरक्षण काशी विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी कर रहे हैं। कार्यक्रम प्रभारी आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज तथा अध्यक्ष अरुण कुमार दूबे हैं। तैयारियां अंतिम चरण में हैं और काशी सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना जताई जा रही है।

काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा भारतीय सनातन संस्कृति का अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायी पर्व है। यह केवल गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और संस्कृति संरक्षण का भी महापर्व है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गुरु को साक्षात ईश्वर का स्वरूप माना गया है तथा गुरु की कृपा और उपदेश से ही आत्मबोध एवं मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। काशी धर्मपीठ की परंपरा भी इसी आध्यात्मिक धारा का प्रतिनिधित्व करती है, जहां गुरु के सान्निध्य से श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन जीने की नई प्रेरणा प्राप्त होती है।

तीन दिवसीय आयोजन के दौरान प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक आध्यात्मिक सत्संग, धर्मसभा और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज के आशीर्वचन होंगे। वहीं सुबह 10 बजे से हरि इच्छा तक विशाल महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क प्रसाद की व्यवस्था रहेगी।

29 जुलाई, बुधवार को गुरु पूर्णिमा के मुख्य दिवस पर विशेष पूजा-अर्चना, गुरु वंदन, चातुर्मास्य व्रतारंभ तथा श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इस दिन हजारों श्रद्धालुओं के आयोजन स्थल पर पहुंचने की संभावना है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज ने बताया कि चातुर्मास महाव्रत की अवधि में प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे तक दर्शन, पूजन, दीक्षा एवं आशीर्वचन होंगे। इसके बाद सुबह 10 बजे से महाप्रसाद भंडारा तथा श्रीमद्भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पर विशेष प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। सायंकाल 5 से 7 बजे तक नियमित आध्यात्मिक प्रवचन तथा शाम 7:30 बजे से महाप्रसाद वितरण होगा। चातुर्मास महाव्रत का समापन 28 सितंबर 2026 को परम गुरुजी की स्मृति में आयोजित समष्टि भंडारे, विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और संत समागम के साथ किया जाएगा।

आयोजन समिति में नागेंद्र दूबे, पुंडरीक पांडेय, मणिभद्र सिंह, पंकज शास्त्री, दिलमोहन तिवारी, बंशी शुक्ला, विनय तिवारी, अधिवक्ता अनुराग शर्मा, अनुपम दूबे, प्रिंस द्विवेदी, शशि सिंह, सुलभ श्रीवास्तव, मनोज मिश्रा, डॉ. रविंद्र कुमार सिंह, पार्षद रमेश यादव, मनीष पांडेय, संतोष पाठक, मंगल तिवारी, राजेश तिवारी, राममणि सारावत, अभिषेक द्विवेदी (गणेश), विजय सिंह, बीरेश मिश्रा, नवीन पांडेय और केशव प्रसाद सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक कार्यकर्ता आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।