गोविंदानंद पर पलटवार, सरकार पर प्रहार, शंकराचार्य बोले- विज्ञापनों से नहीं छिपेगी गौ-वंश की हकीकत

वाराणसी। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार की गौ-सेवा और गौ-संरक्षण संबंधी नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए सरकारी विज्ञापनों को भ्रामक और जमीनी हकीकत से दूर बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के "नीति, नीयत और नतीजे" के दावे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाएगी और गाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने के लिए बड़ा जनआंदोलन चलाया जाएगा।
 

वाराणसी। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार की गौ-सेवा और गौ-संरक्षण संबंधी नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए सरकारी विज्ञापनों को भ्रामक और जमीनी हकीकत से दूर बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के "नीति, नीयत और नतीजे" के दावे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाएगी और गाय को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने के लिए बड़ा जनआंदोलन चलाया जाएगा।

गोविंदानंद के आरोपों का दिया करारा जवाब
वाराणसी के सोनारपुरा स्थित श्रीविद्यामठ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गोविंदानंद सरस्वती के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें उन्हें कांग्रेस का खिलौना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने वाला बताया गया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की छवि किसी और से नहीं, बल्कि उनके अपने कार्यों से बनती और बिगड़ती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनके नाम में 'गोविंद' जुड़ा है, वे यदि गायों के पक्ष में खड़े होने के बजाय उन्हें कष्ट देने वालों का समर्थन कर रहे हैं तो यह कलयुग का प्रभाव है। उन्होंने यह भी कहा कि जब स्वयं मुख्यमंत्री उन्हें किसी का खिलौना साबित नहीं कर सके, तो दूसरे लोग ऐसा कैसे कर पाएंगे।

'गौ-सेवा के सरकारी दावे केवल प्रचार'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा स्थापित 'गो-संसद्' ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से समाचार पत्रों में प्रकाशित गौ-संरक्षण संबंधी विज्ञापनों को पूरी तरह तथ्यहीन बताया। उनका कहना था कि गोरक्षपीठ का महंत प्रदेश का मुख्यमंत्री होने के बावजूद राज्य में गौ-वंश की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विज्ञापनों के जरिए शहरी जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि जमीनी हालात इससे बिल्कुल अलग हैं।

सरकार से पूछे कई बड़े सवाल, गौशालाओं की स्थिति पर उठाई चिंता
गो-संसद् की ओर से सरकार के दावों पर कई सवाल भी उठाए गए। उनका कहना था कि सरकारी विज्ञापन में उत्तर प्रदेश की देशी गंगातीरी गाय के बजाय गुजरात की गीर नस्ल की तस्वीर प्रकाशित की गई, जो अधिकारियों की जानकारी पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने 7,500 से अधिक गौ-आश्रय स्थलों के दावे को भी चुनौती देते हुए कहा कि इनमें से अनेक गौशालाएं गायों के लिए संरक्षण केंद्र नहीं बल्कि यातना गृह बन चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां देशी गायों के साथ जर्सी सांडों को रखकर वर्णसंकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही नंद बाबा योजना और दुग्ध उत्पादन के सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर देशी गायों का वास्तविक योगदान कितना है और सरकार गाय को माता मानती है या केवल एक पशु।

पशुगणना के आंकड़े छिपाने का लगाया आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रदेश सरकार पर पशुगणना के आंकड़े सार्वजनिक न करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में नई पशुगणना के आंकड़े जारी हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया। इसी कारण उपलब्ध और निजी स्रोतों के आधार पर सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सत्ता में है, इसलिए जवाबदेही भी उसी की बनती है।

केदारनाथ धाम विवाद पर भी रखा पक्ष
दिल्ली के बुराड़ी में प्रस्तावित केदारनाथ मंदिर को लेकर उठे विवाद पर भी उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में भगवान केदारनाथ के प्राचीन मंदिर हैं और उनसे किसी को आपत्ति नहीं है। उनका विरोध केवल इस बात को लेकर था कि बुराड़ी स्थित मंदिर को 'केदारनाथ धाम' के रूप में प्रचारित किया गया और यह संदेश देने की कोशिश हुई कि वहां दर्शन करने से मुख्य केदारनाथ धाम जैसा ही फल मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा वहां शिला ले जाने से भी लोगों के बीच गलत संदेश गया।

मीडिया पर दबाव का लगाया आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि उनके बयानों और गतिविधियों को मीडिया में सीमित स्थान देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार ने उन्हें निजी संदेश भेजकर बताया कि ऊपर से निर्देश दिए गए हैं कि उनकी खबरों को या तो प्रकाशित न किया जाए या फिर समाचार पत्र के किसी छोटे कोने में स्थान दिया जाए।

403 विधानसभाओं में अभियान, लखनऊ तक निकलेगा गौ-वंश मार्च
गो-संसद् ने आने वाले समय के लिए कई बड़े कार्यक्रमों की घोषणा भी की। इसके तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में स्थित गौशालाओं की वास्तविक स्थिति के वीडियो तैयार कर जनता के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। 'नोट अभियान' के माध्यम से 'अभिनव आशीर्वाद गोधाम' की स्थापना की जाएगी। आगामी शारदीय नवरात्रि में काशी में विशाल गो-प्रतिष्ठा यज्ञ आयोजित होगा, जबकि दीपावली के बाद प्रदेश के विभिन्न गांवों से लाखों गौ-वंश के साथ लखनऊ की ओर मार्च निकाला जाएगा। इस अभियान के माध्यम से सरकार से गाय को पशु की श्रेणी से हटाकर 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग की जाएगी।

देखें वीडियो 

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