आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाएगा गोवा, पर्यटन मंत्री ने काशी की धार्मिक और गोवा की सांस्कृतिक व प्राकृतिक विविधता के समन्वय पर दिया जोर
वाराणसी। गोवा की पर्यटन पहचान को समुद्र तटों और आधुनिक जीवनशैली तक सीमित रखने के बजाय उसकी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को वाराणसी स्थित होटल ताज गैंगेस में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन ए. खंवटे ने गोवा के पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं और नई दिशा को लेकर जानकारी साझा की।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि गोवा को देश-विदेश में मुख्य रूप से समुद्र तट, मनोरंजन और नाइटलाइफ के लिए जाना जाता है, लेकिन राज्य की पहचान इससे कहीं व्यापक है। गोवा में प्राचीन मंदिर, चर्च, आध्यात्मिक स्थल, लोककला, सांस्कृतिक परंपराएं, प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं। इन सभी को पर्यटन के व्यापक मानचित्र पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि वाराणसी जैसे विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक शहर से संवाद का विशेष महत्व है। वाराणसी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आध्यात्मिक अनुभव और भारतीय संस्कृति को समझने के लिए पहुंचते हैं। इससे स्पष्ट है कि आज पर्यटक केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से भी जुड़ना चाहता है।
खंवटे ने कहा कि इसी सोच के तहत गोवा में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नए आयाम देने पर काम किया जा रहा है। पर्यटन स्थलों को विकसित करने के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी, परंपराओं के संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जाएगा।
उन्होंने गोवा और वाराणसी के बीच पर्यटन क्षेत्र में अनुभवों और विचारों के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि वाराणसी की आध्यात्मिक पहचान और गोवा की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विविधता के बीच बेहतर समन्वय से देश में अनुभव आधारित पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।
प्रेस वार्ता में गोवा के पर्यटन निदेशक केदार नाइक समेत पर्यटन विभाग के अधिकारी और क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान गोवा को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, विरासत और अनुभव आधारित पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। पर्यटन मंत्री ने कहा कि गोवा की पहचान केवल समुद्र तटों तक सीमित नहीं है। राज्य की वास्तविक ताकत उसकी संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और समृद्ध विरासत में भी है, जिसे दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।