गौरव सिंह हत्याकांड में बड़ा न्यायिक फैसला, बीएचयू की तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयना सिंह तलब

बीएचयू के बहुचर्चित गौरव सिंह हत्याकांड में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम आदेश पारित करते हुए तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयना सिंह को हत्या के मुकदमे में आरोपी के रूप में तलब किया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) प्रज्ञा सिंह की अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह आदेश जारी किया। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत 8 सितंबर 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
 

वाराणसी। बीएचयू के बहुचर्चित गौरव सिंह हत्याकांड में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम आदेश पारित करते हुए तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयना सिंह को हत्या के मुकदमे में आरोपी के रूप में तलब किया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) प्रज्ञा सिंह की अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह आदेश जारी किया। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत 8 सितंबर 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

अदालत का यह आदेश बीएचयू से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार विश्वविद्यालय की तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर को हत्या के मुकदमे में अभियुक्त के रूप में तलब किया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया मुकदमे में उनकी भूमिका की जांच और सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत करते हैं।

वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह ने धारा 319 सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान वादी राकेश प्रसाद सिंह तथा प्रत्यक्षदर्शी गवाह आयुषदीप सिंह और अनुराग सिंह के न्यायालय में दर्ज बयानों का हवाला दिया गया। अदालत ने माना कि इन बयानों में प्रो. रोयना सिंह की भूमिका का उल्लेख है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में उनका नाम शामिल था, लेकिन विवेचना के दौरान बिना पर्याप्त कारण बताए उन्हें आरोपियों की सूची से हटा दिया गया। अदालत के अनुसार, केस डायरी में ऐसा कोई संतोषजनक आधार नहीं मिला, जिससे उनके नाम को हटाने का औचित्य सिद्ध हो सके।

यह मामला लंका थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 429/2019 से संबंधित है, जिसमें आईपीसी की धाराओं 147, 148, 149, 302, 34, 120-बी तथा 7 सीएलए एक्ट के तहत मुकदमा विचाराधीन है। अभियोजन के अनुसार, 2 अप्रैल 2019 को बीएचयू परिसर में हुई गोलीबारी में एमसीए के निष्कासित छात्र गौरव सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनकी बाद में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति बन गई थी और पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी।

गौरव सिंह के पिता राकेश प्रसाद सिंह की तहरीर पर तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयना सिंह सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या और आपराधिक षड्यंत्र समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जबकि प्रो. रोयना सिंह का नाम जांच से हटा दिया गया था। अब अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें पुनः आरोपी के रूप में तलब कर मामले को नया मोड़ दे दिया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि हत्या के पीछे विश्वविद्यालय परिसर में कथित आर्थिक वर्चस्व, निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों से अवैध वसूली, दुकानों और कैंटीनों के आवंटन तथा अन्य विवाद कारण थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

फिलहाल अदालत के आदेश के बाद यह मामला नए चरण में पहुंच गया है। अब 8 सितंबर 2026 को प्रो. रोयना सिंह की अदालत में पेशी के साथ इस बहुचर्चित मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। न्यायालय का यह आदेश केवल मुकदमे की प्रक्रिया से संबंधित है और आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्धारण विचारण (ट्रायल) के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।