मणिकर्णिका घाट पर गंगा की तलहटी से निकला कचरा, बाढ़ के बाद चला सफाई अभियान
जलस्तर घटने के बाद नगर निगम कर्मियों ने किया श्रमदान, श्रद्धालुओं से नदी में पुराने कपड़े और पूजन सामग्री नहीं डालने की अपील
वाराणसी। गंगा का जलस्तर घटने के बाद मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर सफाई अभियान चलाया गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद घाट की तलहटी और किनारों पर जमा गाद, प्लास्टिक, पॉलिथीन और पुराने कपड़ों को हटाया गया। अभियान के दौरान गंगा की तलहटी से करीब 100 किलो कपड़े और अन्य कचरा निकाला गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला के संयोजन में नगर निगम के स्वच्छता कर्मचारियों ने श्रमदान कर घाट को साफ किया।
तलहटी और किनारों से हटाया कचरा
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के दौरान घाटों का बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है। पानी उतरने के बाद सीढ़ियों, किनारों और तलहटी में गाद के साथ प्लास्टिक, पॉलिथीन, पुराने कपड़े और पूजन सामग्री जमा हो जाती है। मणिकर्णिका घाट पर भी बाढ़ के बाद यही स्थिति देखने को मिली।
मंगलवार को चलाए गए अभियान में सफाई कर्मचारियों ने घाट के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया, जहां पानी उतरने के बाद कचरा और सिल्ट जमा थी। कर्मचारियों ने पुराने कपड़ों और अन्य कचरे को एकत्र किया। निकाले गए कपड़ों और पॉलिथीन को नगर निगम की टीम को सौंप दिया गया, ताकि उनका उचित निस्तारण किया जा सके।
आस्था के नाम पर नदी में न छोड़ें कपड़े
अभियान के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से गंगा को स्वच्छ रखने की अपील की गई। लोगों से कहा गया कि स्नान और धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुराने कपड़े, पॉलिथीन और पूजन सामग्री नदी में प्रवाहित न करें। इससे गंगा में प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि बाढ़ के बाद घाटों पर बड़ी मात्रा में सिल्ट, प्लास्टिक और पुराने कपड़े जमा हो जाते हैं। इन्हें समय रहते हटाना जरूरी है, ताकि नदी के जल और जलीय जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
स्वच्छता के लिए जनभागीदारी जरूरी
राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा काशी की संस्कृति और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। इसे स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है। धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए, जिससे नदी में प्रदूषण बढ़े। अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बाद घाटों की नियमित सफाई जरूरी है। समय से कचरा हटाने से घाटों की स्वच्छता बनी रहेगी और उसके दोबारा नदी में बहने की आशंका भी कम होगी।