अस्सी से बीएचयू विश्वनाथ धाम तक गंगाजल यात्रा, पांच हजार यादव बंधुओं ने किया जलाभिषेक
सावन के दूसरे सोमवार को हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंजा बीएचयू परिसर, 1962 से निभाई जा रही परंपरा
रिपोर्ट - ओमकार नाथ
वाराणसी। सावन के दूसरे सोमवार पर काशी में आस्था, भक्ति और वर्षों पुरानी परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सीर गोवर्धन क्षेत्र के करीब पांच हजार यादव बंधुओं ने अस्सी घाट से गंगाजल भरकर बीएचयू स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक किया। इस दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार, समाज और समूचे क्षेत्र के सुख-समृद्धि एवं लोकमंगल की कामना की।
सुबह श्रद्धालु अस्सी घाट पहुंचे और मां गंगा में स्नान के बाद विधि-विधान से गंगा पूजन किया। इसके बाद गगरी और घड़ों में गंगाजल भरकर जलाभिषेक यात्रा शुरू की गई। हाथों में गंगाजल और जुबां पर बाबा विश्वनाथ का जयघोष लिए श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे। यात्रा के दौरान भक्ति का माहौल बना रहा।
अस्सी घाट से गंगाजल लेकर श्रद्धालु केदार घाट पहुंचे, जहां पूजन-अर्चन के बाद आगे की यात्रा जारी रखी। इसके बाद सभी बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और बाबा का गंगाजल से अभिषेक किया। मंदिर में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना की।
1962 से चली आ रही परंपरा
सीर गोवर्धन के यादव बंधुओं द्वारा सावन में बीएचयू विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक की परंपरा कई दशकों पुरानी है। स्थानीय निवासी सुनील कुमार यादव के अनुसार मंदिर के निर्माण के बाद से ही यादव समाज के लोग सावन में बाबा का जलाभिषेक करते आ रहे हैं। परंपरा के तहत सावन के पहले सोमवार को पुराने विश्वनाथ मंदिर और दूसरे सोमवार को बीएचयू स्थित नए विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है।
अमन यादव ने बताया कि इस बार भी हजारों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से परिवारों में सुख-शांति और समाज के कल्याण की प्रार्थना की।
मंदिर के बाहर लगी लंबी कतार
सावन के दूसरे सोमवार पर बीएचयू विश्वनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। मंदिर के बाहर लंबी कतार लगी रही। बीएचयू परिसर और आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल रहा।
252 फीट ऊंचा है मंदिर का शिखर
बीएचयू परिसर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और ऊंचे शिखर के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के शिखर की ऊंचाई करीब 252 फीट बताई जाती है। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर विनय कुमार पांडे के अनुसार मंदिर की वास्तुशैली में द्रविड़, नागर और बेसर शैली का समन्वय देखने को मिलता है।
मंदिर के निर्माण का संकल्प महामना पंडित मदन मोहन मालवीय से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्च 1931 में स्वामी कृष्णम ने इसकी आधारशिला रखी थी। उद्योगपति जुगल किशोर बिड़ला ने 1954 में निर्माण कार्य पूरा कराया, जबकि मंदिर का शिखर बाद में पूर्ण हुआ और 1962 में मंदिर पूरी तरह तैयार हुआ।
पीएम मोदी भी कर चुके हैं अभिषेक
वर्ष 2018 में काशी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचे थे। रात करीब 10:20 बजे मंदिर पहुंचकर उन्होंने भगवान शिव का अभिषेक किया और करीब 17 मिनट मंदिर परिसर में रहे।
सावन के दूसरे सोमवार पर अस्सी घाट से बीएचयू विश्वनाथ मंदिर तक गंगाजल लेकर पहुंचे यादव बंधुओं की यह यात्रा काशी की जीवंत धार्मिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक बनी। दशकों से चली आ रही इस परंपरा में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।