घूंघट की चौखट से आत्मनिर्भरता तक: काशी की उर्मिला ने बदली अपनी तकदीर, गांव की महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
- वाराणसी के गाजीपुर गांव की उर्मिला पटेल ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की
- महिलाओं के लिए नए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी तैयार किए
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के आराजीलाइन विकासखंड के गाजीपुर गांव की रहने वाली उर्मिला पटेल आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। कॉलेज शिक्षित उर्मिला संयुक्त परिवार के साथ एक कच्चे घर में रहती हैं। कुछ वर्ष पहले तक उनका जीवन भी गांव की अन्य महिलाओं की तरह घर की चारदीवारी तक ही सीमित था, जहां आय अर्जित करने या अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर बेहद सीमित थे।
उर्मिला के पति मनोज दिहाड़ी मजदूर के रूप में कार्य करते थे। अनिश्चित आय और बड़े परिवार की जिम्मेदारियों के कारण घर की आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी रहती थी। सामाजिक परंपराओं के चलते गांव में घूंघट प्रथा प्रचलित थी और महिलाओं का घर से बाहर निकलना या सामुदायिक बैठकों में भाग लेना अच्छा नहीं माना जाता था।
जब उर्मिला ने घर से बाहर निकलकर बैठकों में जाना शुरू किया तो उन्हें समाज के तानों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इन मुश्किलों से हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ती रहीं।
जुलाई 2017 में उर्मिला ने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर आजीविका के अवसर तलाशने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group - SHG) की सदस्यता ग्रहण की। यह कदम उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, वित्तीय प्रबंधन, सामुदायिक नेतृत्व और स्वरोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिली। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना शुरू किया।
आज उर्मिला की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को अवसर, सहयोग और सही मार्गदर्शन मिले तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनकी कहानी ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।