घर की दहलीज से राष्ट्रीय पहचान तक, वाराणसी की नीतू सिंह बनीं ‘नमो ड्रोन दीदी’

हौसले बुलंद हों तो गांव की दहलीज से भी सफलता की उड़ान भरी जा सकती है। वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक के ऊंच गांव की रहने वाली नीतू सिंह इसकी मिसाल हैं। कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली नीतू आज ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर किसानों की मदद कर रही हैं। उनकी मेहनत ने उन्हें वाराणसी से लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बिहार तक पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके काम की सराहना कर चुके हैं। आज वह ‘नमो ड्रोन दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं।
 

मुंबई में हुई परवरिश, शादी के बाद गांव में शुरू किया नया सफर, ड्रोन से खेती में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर बनीं किसानों की पसंद

25 एकड़ खेतों में मुफ्त छिड़काव कर जीता किसानों का भरोसा, प्रतिदिन 10 से 15 एकड़ खेतों में करती हैं छिड़काव, वाराणसी से बिहार तक बढ़ी मांग

कभी छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर थीं निर्भर, आज दो हजार रुपये प्रतिदिन तक कमाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार कर चुके हैं मुलाकात, कार्यों की सराहना से मिली नई पहचान

स्पेशल रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। हौसले बुलंद हों तो गांव की दहलीज से भी सफलता की उड़ान भरी जा सकती है। वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक के ऊंच गांव की रहने वाली नीतू सिंह इसकी मिसाल हैं। कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली नीतू आज ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर किसानों की मदद कर रही हैं। उनकी मेहनत ने उन्हें वाराणसी से लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बिहार तक पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके काम की सराहना कर चुके हैं। आज वह ‘नमो ड्रोन दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं।

मुंबई में हुई परवरिश, गांव में बदली जिंदगी की राह
नीतू सिंह ने बताया कि उनका बचपन और शिक्षा मुंबई में हुई। शादी के बाद गांव आने पर उनका जीवन घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित था। इसी दौरान वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और ग्रामीण महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी मिली। जनवरी 2024 में सखी ड्रोन योजना के बारे में पता चलने पर उन्होंने आवेदन किया। इसके बाद प्रयागराज के फूलपुर में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। मई 2024 में उन्हें सरकार की ओर से ड्रोन, तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहन और जनरेटर उपलब्ध कराया गया। इन उपकरणों की अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई।

25 एकड़ में मुफ्त छिड़काव कर जीता किसानों का भरोसा
ड्रोन मिलने के बाद नीतू के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों का विश्वास जीतना था। ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन से छिड़काव नई तकनीक थी, इसलिए कई किसान इसके परिणामों को लेकर आशंकित थे। शुरुआत में काम नहीं मिलने से उन्हें निराशा भी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। किसानों को तकनीक का लाभ समझाने के लिए करीब 20 से 25 एकड़ खेतों में निशुल्क छिड़काव किया। फसलों पर इसके परिणाम देखने के बाद किसानों का भरोसा बढ़ने लगा। धीरे-धीरे उन्हें दोबारा काम मिलने लगा और उनकी पहचान आराजी लाइन व सेवापुरी सहित अन्य क्षेत्रों में भी बनने लगी।

15 मिनट में एक एकड़ में छिड़काव, रोजाना 10 से 15 एकड़ खेतों में काम
नीतू के मुताबिक, ड्रोन के माध्यम से करीब 15 मिनट में एक एकड़ खेत में यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है। वह प्रतिदिन लगभग 10 से 15 एकड़ खेतों में छिड़काव करती हैं। हालांकि, समय खेत की स्थिति, फसल और छिड़काव की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्र में छिड़काव करने में मदद मिलती है। उनके ड्रोन में मानचित्र आधारित प्रणाली भी है, जिससे निर्धारित क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से छिड़काव किया जा सकता है।

वाराणसी से बिहार तक पहुंची मांग
नीतू के काम की चर्चा अब वाराणसी तक सीमित नहीं है। जौनपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली समेत कई जिलों से उन्हें छिड़काव के लिए बुलाया जाता है। बिहार से भी मांग आने लगी है। नीतू बताती हैं कि कई बार एक साथ अलग-अलग स्थानों से किसानों के फोन आते हैं। काम की अधिकता के कारण कभी-कभी कुछ किसानों के यहां जाने का कार्यक्रम भी रद्द करना पड़ता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि तकनीक के प्रति बढ़ती रुचि का पता चलता है।

20 रुपये के लिए दूसरों पर निर्भरता, अब प्रतिदिन दो हजार रुपये तक कमाई
नीतू ने बताया कि एक समय छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें 20 से 25 रुपये के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज ड्रोन संचालन के माध्यम से वह प्रतिदिन करीब दो हजार रुपये तक कमा लेती हैं। उनके साथ दो सहयोगी भी काम करते हैं, जिन्हें वह प्रतिदिन 600 से 700 रुपये तक मजदूरी देती हैं। इस तरह उनके काम से अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। उनके पति राजगीर का काम करते हैं। नीतू के अनुसार, कई बार पति भी उनके साथ काम पर जाते हैं, जिससे परिवार की संयुक्त दैनिक कमाई दो से तीन हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इससे परिवार के खर्च चलाने में मदद मिलती है।

प्रधानमंत्री मोदी से दो बार मुलाकात, मिली ‘नमो ड्रोन दीदी’ की पहचान
नीतू के सफर का अहम पड़ाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात रहा है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री से उनकी दो बार मुलाकात हो चुकी है। पहली मुलाकात वाराणसी के बरकी में आयोजित जनसभा के दौरान हुई थी। नीतू बताती हैं कि प्रधानमंत्री ने उनके काम की सराहना करते हुए उन्हें ‘नमो ड्रोन दीदी’ के रूप में संबोधित किया। करीब दो हजार एकड़ खेतों में छिड़काव का काम पूरा करने के बाद उन्हें दिल्ली में भी प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिला। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने काम और किसानों से मिल रहे सहयोग की जानकारी दी। नीतू ने एक और ड्रोन की आवश्यकता भी बताई थी।

ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
नीतू सिंह की सफलता बताती है कि प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर ग्रामीण महिलाएं भी रोजगार के नए अवसर तलाश सकती हैं। उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार दिया। कभी जिस तकनीक को लेकर किसान आशंकित थे, आज उसी ड्रोन के जरिए नीतू खेती-किसानी में सहयोग कर रही हैं। ऊंच गांव की यह महिला अब उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।