पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने संस्कृत विश्वविद्यालय में विकास कार्यों का किया अवलोकन, सीएसआर से हो रहे कार्यों को सराहा
पांडुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण और ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था देखी, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को बताया सराहनीय
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र ने रविवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहे विकास कार्यों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने परिसर में निर्माण, पांडुलिपि संरक्षण, संग्रहालय के संवर्धन और ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं को देखा। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में सीएसआर फंड से कराए जा रहे विकास कार्यों और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।
दुर्गा शंकर मिश्र ने संग्रहालय, लालभवन, पाणिनी भवन, शताब्दी भवन अतिथि गृह, श्रमण विद्या संकाय और श्री श्री आनंदमयी महिला छात्रावास का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। उन्होंने निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय में पूरा करने तथा आवश्यकतानुसार गति बढ़ाने पर जोर दिया।
पांडुलिपियां भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य निधि
दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कार्यों को देखते हुए मिश्र ने कहा कि ये भारतीय मनीषा की अमूल्य ज्ञान-संपदा हैं। इनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण भावी पीढ़ियों, विद्यार्थियों, अध्येताओं एवं शोधार्थियों के लिए ज्ञान के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। उन्होंने ‘उत्कृष्ट ज्ञान भारतम्’ की ओर से किए जा रहे वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और डिजिटलीकरण कार्यों की जानकारी ली। संग्रहालय में ऐतिहासिक एवं ज्ञानपरक सामग्री के संरक्षण, संवर्धन और प्रभावी प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा के विस्तार पर जोर
ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में संचालित डिप्लोमा कक्षाओं का भौतिक अवलोकन कर उन्होंने शिक्षण एवं तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को देश-विदेश तक पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर देते हुए व्यवस्था को और प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए मार्गदर्शन दिया।
कुलपति के प्रयासों की सराहना
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंटकर दुर्गा शंकर मिश्र का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के विकास का तैयार खाका अब निर्माण, संरक्षण, शैक्षणिक और तकनीकी कार्यों के रूप में धरातल पर साकार हो रहा है। इसमें मिश्र का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है।कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर कुलानुशासक, वैज्ञानिक प्रो. जितेन्द्र कुमार अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।