तीन महीने से जलभराव, लकड़ी के पुल से आवागमन, नीलकंठ नगर कॉलोनी का हाल, दुर्व्यवस्था से जनजीवन बेहाल
चितईपुर के कंदवा स्थित कॉलोनी में जलभराव से बढ़ी परेशानी, शादी वाले घर में भी मेहमानों के आने-जाने में दिक्कत
मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से बीमारी की आशंका, शादी वाले परिवार को भी आवाजाही में परेशानी
स्थानीय लोगों ने स्थायी जलनिकासी की मांग की, समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी। चितईपुर क्षेत्र के कंदवा स्थित नीलकंठ नगर कॉलोनी में करीब तीन महीने से जलभराव की समस्या बनी हुई है। घरों के आसपास लंबे समय से पानी जमा होने के कारण लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित है। स्थिति यह है कि स्थानीय लोगों ने घरों से बाहर निकलने के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल बना लिया है। इसी के सहारे लोगों को आवागमन करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्या लगातार बनी हुई है। बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में कई लोगों के बुखार से पीड़ित होने की बात कहते हुए बीमारी फैलने की आशंका जताई है।
शादी वाले घर में भी परेशानी
जलभराव के बीच कॉलोनी में एक परिवार में शादी का आयोजन है। ऐसे में रिश्तेदारों और मेहमानों के आने-जाने में भी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में ही घर से निकलना मुश्किल है, जबकि शादी के आयोजन के कारण समस्या और बढ़ गई है। मजबूरी में लोगों को लकड़ी के बनाए अस्थायी पुल का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी अमरावती, जानकी पटेल और साधना पटेल ने बताया कि कॉलोनी में काफी समय से पानी जमा है। कई बार समस्या की जानकारी संबंधित लोगों को दी गई, लेकिन अब तक जलनिकासी का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि लंबे समय तक पानी जमा रहने से घरों के आसपास रहना भी मुश्किल हो रहा है।
मंत्री के आवास वाले वार्ड में समस्या
स्थानीय निवासी अमन यादव ने कहा कि करीब तीन महीने से लोग जलभराव की समस्या झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस वार्ड में प्रदेश सरकार के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा का आवास भी है, उसी क्षेत्र के लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके बावजूद स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर जलभराव के कारणों की जांच कराने और तत्काल पानी की निकासी कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अस्थायी उपायों के बजाय ऐसी स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे भविष्य में दोबारा जलभराव की स्थिति न बने।